जल जीवन मिशन को पूरा करने नई डेडलाइन
भोपाल । जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीणों के घरों तक शुद्ध जल पहुंचाना था। इसमें करोड़ों रुपये तो खर्च किए गए, लेकिन आज भी कई क्षेत्र है जहां ग्रामीणों को पीने के पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसकी डेडलाइन मार्च, 2024 रखी गई थी। इसको देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के दौरान जल जीवन मिशन की अवधि 2028 तक बढ़ाने की घोषणा की है। सरकार ने सभी घरों तक नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाई है। केंद्र सरकार के इस फैसले से अन्य राज्यों के साथ मप्र को भी फायदा होगा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीणों के घरों में नल के जरिए पानी पहुंचाना है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में टंकियों का निर्माण कार्य शुरू किया गया। लोगों के घरों तक पाइपलाइन बिछाए भी गए, लेकिन कई गांवों में आज तक पानी की टंकी ही पूरी नहीं बन पाई है। जो बनी है, वह भी आधी अधूरी है। लेकिन अब जल जीवन मिशन को पूरा करने नई डेडलाइन दी गई है। इसके तहत 2028 तक जल जीव मिशन को पूरा करना है।
42 लाख घरों तक पहुंचा है पानी
गौरतलब है कि मप्र में जल जीवन मिशन का काम अधूरा पड़ा है। मिशन में प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र के एक करोड़ 11 लाख घरों तक नल से जल पहुंचाए जाने का लक्ष्य है। जल जीवन मिशन की शुरुआत से अब तक इनमें से 5 साल में करीब 69 लाख घरों में नल से पानी की सप्लाई शुरू हो गई है। यह लक्ष्य का लगभग 63 प्रतिशत है। मप्र को शेष 42 लाख घरों तक नल से पानी पहुंचाने के लिए अब चार साल का समय और मिल गया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में कोरोना काल में दो साल तक जल जीवन मिशन का काम प्रभावित रहा, इस कारण तय समय सीमा में मिशन का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। वर्तमान में जल जीवन मिशन के प्रोजेक्ट में कोई बाधा नहीं है। वर्ष 2028 से पूर्व जल जीवन मिशन का काम पूरा होने के आसार हैं। जुलाई, 2022 में मप्र का बुरहानपुर देश का पहला हर घर जल प्रमाणित जिला बना था। जून, 2023 में निवाड़ी प्रदेश का दूसरा हर घर जल प्रमाणित जिला घोषित हुआ था। यानी इन दोनों जिलों के हर घर में नल से पानी की सप्लाई की जा रही है। इंदौर में भी लगभग जल जीवन मिशन का काम पूरा हो गया है। जल्द ही इसे हर घर जल प्रमाणित जिला घोषित किया का सकता है।
मिशन में अनियमतता के आरोप
मप्र में जल जीवन मिशन सवालों के घेरे में रहा है। मप्र विधानसभा के जुलाई के मानसून सत्र और दिसंबर में आयोजित शीतकालीन सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने मिशन में अनियमतता के आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा था। विधायकों की सबसे ज्यादा शिकायतें मिशन में व्याप्त भ्रष्टाचार, पाइप लाइन बिछाने के बाद सडक़ों का रेस्टोरेशन नहीं किए जाने और ठेकेदारों द्वारा काम पूरा नहीं किए जाने को लेकर थीं। मानसून सत्र में विधायकों ने जल जीवन मिशन के मुद्दे पर 100 से ज्यादा सवाल पूछे थे। मप्र में जल जीवन मिशन योजना में 51 हजार से ज्यादा गांव शामिल किए गए हैं। इन गावों में एक करोड़ 11 लाख घर हैं। अब तक 69 लाख घरों में पानी की सप्लाई की जा चुकी है। शेष 42 लाख गांव बचे हैं, जहां 2028 तक पानी की सप्लाई करनी है। पीएचई मंत्री संपतिया उईके का कहना है कि जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री का आभार। प्रदेश में जल जीवन मिशन का काम सुचारू रूप से चल रहा है। करीब 40 लाख घरों में नल कनेक्शन होना बाकी है। मिशन की अवधि 2028 तक बढ़ा दी गई है। इस अवधि में काम पूरा कर लिया जाएगा।
अभी अधूरा है मिशन
बता दें कि देश के प्रत्येक गांव के हर घर में नल से पानी की सप्लाई के लिए केंद्र सरकार ने 15 अगस्त, 2019 को जल जीवन मिशन लॉन्च किया था। इसकी डेडलाइन मार्च, 2024 रखी गई थी। यानी इस तारीख तक देश के ग्रामीण क्षेत्र के हर घर में नल से पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जानी थी, लेकिन सरकार का यह मिशन पूरा नहीं हो सका। इस कारण जल जीवन मिशन की अवधि 2028 तक बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार का दावा है कि देश में वर्ष 2019 से लेकर अब तक 15 करोड़ से ज्यादा परिवारों को इस जल जीवन मिशन का लाभ दिया गया है। यानी लगभग 80 फीसदी ग्रामीण आबादी के घरों में नल से पेयजल की सुविधा पहुंच चुकी है। जब यह मिशन लॉन्च हुआ था, तब तक केवल 3.23 करोड ग्रामीण परिवारों के घरों में ही पेयजल के कनेक्शन थे, लेकिन अक्टूबर, 2024 में यह संख्या बढक़र 15.20 करोड़ हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत 67,000 करोड़ रुपए पर प्रावधान किया है।
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