शेयर बाजार में तूफान, 1996 के बाद से सबसे बड़ी गिरावट का सामना कर रहा भारतीय बाजार
बाजार में जारी तूफ़ान थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. 5 महीने से जारी बाजार की गिरावट अब नया रिकॉर्ड तोड़ने के करीब है. भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निफ्टी 50 इंडेक्स अपने 30 साल के इतिहास में दूसरी सबसे लंबी मासिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है. NSE का प्रमुख सूचकांक निफ़्टी जुलाई 1990 में शुरू हुआ था, और तब से अब तक केवल दो बार ऐसा हुआ है जब निफ्टी 50 ने लगातार पांच या उससे ज्यादा महीनों की गिरावट दर्ज की है.यर बाजार में जारी तूफ़ान थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. 5 महीने से जारी बाजार की गिरावट अब नया रिकॉर्ड तोड़ने के करीब है. भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के चलते निफ्टी 50 इंडेक्स अपने 30 साल के इतिहास में दूसरी सबसे लंबी मासिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है. NSE का प्रमुख सूचकांक निफ़्टी जुलाई 1990 में शुरू हुआ था, और तब से अब तक केवल दो बार ऐसा हुआ है जब निफ्टी 50 ने लगातार पांच या उससे ज्यादा महीनों की गिरावट दर्ज की है.इंडेक्स में हाई वेटेज रखने वाले शेयरों में हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), आईटीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज क्रमशः 24%, 22% और 18% तक टूट चुके हैं. इस अवधि में केवल तीन शेयर—विप्रो, बजाज फाइनेंस और कोटक महिंद्रा बैंक—लाभ में रहे हैं, जिनमें 6% से 9% तक की वृद्धि दर्ज की गई है.
कितना और गिरेगा?
तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी जल्द ही 22,500 से 22,400 के स्तर तक गिर सकता है. जब तक निफ्टी 22,850 के नीचे रहता है, तब तक इसमें बिकवाली का दबाव बना रहेगा. इसका मतलब है कि जैसे ही निफ्टी थोड़ा ऊपर जाएगा, निवेशक शेयर बेचने लगेंगे. LKP सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे के अनुसार, पिछले साल सितंबर के अंत से सूचकांक गिर रहा है और डेली चार्ट पर एक लोअर टॉप-लोअर बॉटम पैटर्न बना रहा है, जो बाजार में कमजोरी का संकेत है.
बाजार पर क्यों बढ़ रहा दबाव?
इसके अलावा, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध और चीन के शेयर बाजार में तेजी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है. विदेशी निवेशक अपना पैसा भारत से निकालकर चीन में लगा रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा है. अक्टूबर 2024 से भारत का बाजार पूंजीकरण 1 ट्रिलियन डॉलर घट गया है, जबकि चीन का 2 ट्रिलियन डॉलर बढ़ गया है. हैंग सेंग इंडेक्स सिर्फ एक महीने में 18.7% चढ़ गया है, जबकि निफ्टी में 1.55% की गिरावट आई है.
किस स्ट्रेटेजी पर हैं विदेशी निवेशक
विश्लेषकों का मानना है कि ‘भारत में बेचो, चीन में खरीदो’ का यह रुझान जारी रह सकता है, क्योंकि चीनी शेयर अभी भी सस्ते हैं. Dezerv के सह-संस्थापक वैभव पोरवाल के अनुसार, चीन ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सितंबर 2024 में आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की थी, जिससे वहां के शेयर बाजारों में तेजी आई है.
निवेशकों के लिए राय
ऐसे माहौल में, विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को सोच-समझकर अच्छे शेयरों में निवेश करना चाहिए और छोटे शेयरों में निवेश करने से बचना चाहिए जिनका वार्षिक मुनाफा 100 करोड़ रुपये से कम है. साथ ही, उन्हें टैक्स लाभ के लिए घाटे वाले शेयरों को बेचने पर भी विचार करना चाहिए.
सेंसेक्स का भी बुरा हाल
बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स पिछले साल 27 सितंबर को 85,978.25 के अपने रिकॉर्ड हाई पर था. उस दिन के बाद शेयर बाजार को ऐसी नजर लगी कि घरेलू शेयर बाजार में लगातार गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया और सेंसेक्स और निफ़्टी गिरते चले गए. पिछले पांच महीनों में निफ्टी अपने सर्वकालिक उच्चस्तर से 3,729.8 अंक यानी 14.19 प्रतिशत गिर चुका है. वहीं सेंसेक्स अपने रिकॉर्ड शिखर से 11,376.13 अंक यानी 13.23 फीसदी गिर गया है.
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