लंबे समय तक ईयरफोन लगाने के नुकसान! स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की अहम चेतावनी
अगर आप घंटों-घंटों तक कान में ईयरफोन और हेडफोन लगाए रहते हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि इससे सुनने की क्षमता कम हो जाएगी और आप बहुत जल्द बहरे भी हो सकते हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसको लेकर चेतावनी दी है. स्वास्थ्य मंत्रालय सभी राज्यों को इसको लेकर लेटर जारी किया है. खासकर स्वास्थ्य मंत्रालय की ये चेतावनी युवाओं को लेकर है क्योंकि सबसे ज्यादा इसका इस्तेमाल यही लोग करते हैं. हेल्थ मिनिस्ट्री ने राज्यों और मेडिकल कॉलेजों से इसके लंबे समय तक उपयोग के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए कहा है.
डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विस प्रोफेसर डॉ अतुल गोयल ने बच्चों के लिए स्क्रीन समय सीमित करने के महत्व पर भी जोर दिया है. उन्होंने कहा कि लगातार मोबाइल देखने से मस्तिष्क के संज्ञानात्मक विकास में देरी हो सकती है, जिससे सोशल इंटरैक्शन और कम्युनिकेशन प्रभावित हो सकता है. प्रोफेसर गोयल ने कहा कि लोग 50 डेसिबल से अधिक ध्वनि वाले ऑडियो उपकरणों का इस्तेमाल न करें बल्कि प्रतिदिन दो घंटे से अधिक ध्वनि वाले ऑडियो उपकरणों का उपयोग करें और सुनने के सत्र के दौरान ब्रेक लें.
DGHS ने 20 फरवरी को जारी किया था लेटर
उन्होंने कहा कि संभव हो अच्छी तरह से फिट या शोर-रद्द करने वाले हेडफोन का इस्तेमाल करें ताकि ऑडियो को कम मात्रा में चलाया जा सके. डॉक्टर गोयल ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को भी कम करने को कहा है. साथ ही बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग के संपर्क में नहीं आने देने को कहा है. सार्वजनिक कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए डॉ गोयल ने कहा कि राज्य यह सुनिश्चित करें कि स्थानों पर अधिकतम औसत ध्वनि स्तर 100 डेसिबल से अधिक न हो. DGHS ने 20 फरवरी को यह लेटर जारी किया था.
DGHS के लेटर में क्या कहा गया है?
इस लेटर में कहा गया है कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है लेकिन इसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है. लगातार और लंबे समय तक ईयरफोन और हेडफोन के इस्तेमाल से सुनने की समस्या हो सकती है. युवा वर्ग इसके ज्यादा आदि हैं और उन्हीं को यह प्रभावित करेगा. हाल के अध्ययनों से पता चला है कि लंबे समय तक ईयरफोन और हेडफोन के इस्तेमाल से सुनने की अपरिवर्तनीय क्षति हो सकती है.
अगर एक बार सुनने की समस्या आ जाएगी तो फिर इसे ठीक होना मुश्किल हो सकता है. लंबे समय तक ईयरफोन और हेडफोन के इस्तेमाल की प्रक्रिया एक अवसाद को जन्म दे सकता है, जो फिर कभी ठीक नहीं हो सकता है. एक बार जब श्रवण स्थायी रूप से खराब हो जाता है, तो श्रवण यंत्र या कॉक्लियर प्रत्यारोपण द्वारा सामान्य श्रवण कभी भी बहाल नहीं किया जा सकेगा.
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