वक्फ अधिनियम पर चुप्पी क्यों? पीडीपी ने सरकार से मांगा जवाब
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा द्वारा वक्फ अधिनियम पर प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है. इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों ने चिंता जताई है. पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की एक तत्काल बैठक बुलाई. श्रीनगर में आयोजित इस बैठक में डॉ. महबूब बेग, आसिया नक्श, गुलाम नबी लोन हंजूरा, मुहम्मद खुर्शीद आलम, बशारत बुखारी और अन्य सहित पीडीपी के प्रमुख नेता शामिल हुए. कथित तौर पर नेताओं ने विधायी मंच पर वक्फ से संबंधित मामलों को संबोधित करने में देरी के निहितार्थों पर विस्तार से चर्चा की.
पार्टी सूत्रों ने बताया कि महबूबा मुफ्ती ने इस मुद्दे पर विधानसभा की चुप्पी पर गंभीर चिंता व्यक्त की और इसे गहरे धार्मिक और प्रशासनिक महत्व का मामला बताया.
पीडीपी की बैठक में बना ये प्लान
उन्होंने कथित तौर पर पार्टी के सहयोगियों से कहा, “वक्फ अधिनियम पर प्रस्ताव पारित करने में विफलता केवल एक राजनीतिक चूक नहीं है, यह हमारे संस्थानों की धार्मिक भावना और स्वायत्तता को प्रभावित करती है.” वक्फ संपत्तियां, जिनमें दरगाह, मस्जिद और कब्रिस्तान शामिल हैं, लंबे समय से इस क्षेत्र में मुस्लिम समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का केंद्र रही हैं.
उन्होंने कहा कि उचित कानून के माध्यम से उनके प्रशासन को संचालित करने में किसी भी तरह की देरी या अस्पष्टता ने समुदाय के भीतर आशंका पैदा कर दी है.
महबूबा मुफ्ती ने सीएम उमर पर साधा निशाना
बैठक में मौजूद नेताओं ने स्पष्ट कानून की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया जो वक्फ संपत्तियों को कुप्रबंधन या राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाता है, उन्होंने सरकार से वक्फ अधिनियम पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और धार्मिक निकायों की पवित्रता सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया.
बता दें कि हाल में लोकसभा और राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया है. उसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है. इससे इस विधेयक का कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन विपक्षी पार्टियां लगातार वक्फ कानून का विरोध कर रही हैं. ऐसे में जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला के रवैया पर महबूबा मुफ्ती ने रोष जताया है और उन पर सियासी हमला बोला है.
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