छत्तीसगढ़ में ऑपरेशन कगार, बांग्लादेश में विरोध – आखिर क्या है कनेक्शन?
भारत सरकार ने नक्सल और माओवादी विचारधारा खत्म करने के लिए ऑपरेशन कगार चलाया हुआ है. जिसके तहत छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है. सुरक्षा बलों ने CPI (माओवादी) के महासचिव केशव राव उर्फ बासवराजू समेत तकरीबन 27 नक्सलियों को मार गिराया गया.जहां भारत में इसको सुरक्षाबलों की कामयाबी बताया जा रहा है, वहीं बांग्लादेश में इसके ऊपर आंसू बहाए जा रहे हैं. बांग्लादेश की एक संस्थान, जिससे पहले यूनुस भी जुड़े थे, उसनके 71 प्रमुख लोगों ने भारत में हुई इन हत्याओं का विरोध किया है और इस ऑपरेशन को माओवादी अवाजों को दबाने के लिए सोची समझी साजिश बताया गया है.
ऑपरेशन कगार को बताया राज्य आतंकवाद
रविवार को एक बयान जारी करते हुए इन नागरिकों ने कहा कि 21 मई को नरेंद्र मोदी सरकार के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन कगार’ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव बसव राज समेत 28 माओवादी राजनीतिक कार्यकर्ता मारे गए. हत्या के बाद एनकाउंटर का नाटक रचा गया है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि तथाकथित माओवादी दमन अभियान के नाम पर एक योजनाबद्ध राज्य आतंकवाद चलाया जा रहा है, बयान में कहा गया है, “हम, बांग्लादेश की प्रगतिशील और लोकतांत्रिक आवाजें, इस हत्या सहित ऑपरेशन कगार के दौरान की गई सोची समझी राज्य हत्याओं की कड़ी निंदा और विरोध करते हैं.”
ऑपरेशन कगार को बंद करे भारत सरकार
बयान जारी करते हुए इन बांग्लादेशी नागरिकों ने मांग की है कि ऑपरेशन कगार को तत्काल बंद किया जाए. साथ ही बयान में दुनिया भर के क्रांतिकारी, लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और मानवाधिकार संगठनों से भारत के मूलनिवासी और उत्पीड़ित लोगों के साथ खड़े होने का आह्वान किया है.
भारत में वामपंथ पार्टियां कर रही विरोध
इस ऑपरेशन का बांग्लादेश में ही नहीं भारत में भी विरोध हो रहा है. वामपंथ विचारधारा के संघठन भी इस ऑपरेशन का विरोध करल रहे हैं. वहीं कई नेताओं ने मांग की है इसको रोका जल्द से जल्द रोका जाए.
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