मालेगांव ब्लास्ट पर बवाल: सभी आरोपी निर्दोष करार, विपक्ष ने जताई नाराज़गी
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की एक विशेष अदालत ने मालेगांव में 2008 के बम विस्फोट मामले में सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद ‘सैफ्रॉन टेरर’ या भगवा आतंकवाद शब्द के इस्तेमाल पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस मामले में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की प्रतिक्रियाएं सामने आई। भाजपा के नेताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकता। वहीं विपक्ष ने फैसले को निराशाजनक बताया है। कांग्रेस का कहना है कि जांच कमजोर की गई और एनआईए की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आतंकवादी न कभी भगवा था, न है और न कभी होगा। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोडऩा चाहिए। आतंक का कोई धर्म नहीं होता। हिंदू आतंकवाद या इस्लामी आतंकवाद जैसी कोई चीज नहीं है।
हर धर्म प्रेम, सद्भाव, सत्य और अहिंसा का प्रतीक है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। कांग्रेस के हिंदू आतंकवाद का षड्यंत्र आज धाराशायी हो गया। किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। भाजपा इस फैसले का स्वागत करती है। एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से सवाल किया कि क्या वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे या नहीं? समाजवादी पार्टी के मुख्यिा अखिलेश यादव ने कहा कि जो बात आप (मीडिया) समझ रहे हो वही मैं समझ रहा हूं। जो आप कहना नहीं चाहते वे मैं नहीं कह रहा। कहीं ऐसा तो नहीं कि खबरें दबाने के लिए खबर आ रही हो?
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