पाकिस्तान में हर बार तेल की उम्मीद, हर बार निराशा क्यों?
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में समुद्री क्षेत्र में तेल और गैस के विशाल भंडार मिलने की अफवाह एक बार फिर चर्चा में है। कभी “नीला खजाना” तो कभी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने इस अफवाह को और हवा दे दी है। हालांकि हकीकत यह है कि अब तक की खुदाई में कोई बड़ा तेल या गैस भंडार नहीं मिला है।
2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने कराची से 230-280 किमी दूर समुद्र में तेल-गैस भंडार मिलने का दावा किया था। उन्होंने यहां तक कहा था कि यह भंडार इतना बड़ा होगा कि पाकिस्तान तेल निर्यातक देश बन जाएगा। अमेरिकी कंपनी ExxonMobil और इटली की ENI कंपनी ने “केकरा-1” ब्लॉक में खुदाई की, लेकिन केवल पानी मिला। इस परियोजना में करीब 124 अरब डॉलर खर्च हुए, जबकि सफलता की संभावना महज 12% थी।
2024 में फिर से ‘नीला खजाना’ का शिगूफा
सितंबर 2024 में पाकिस्तानी मीडिया में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने समुद्र में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल और गैस भंडार खोजा है, जिसे “नीला खजाना” नाम दिया गया। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, 5500 मीटर तक खुदाई के बावजूद कोई महत्वपूर्ण संसाधन नहीं मिला।
ट्रंप ने भी जोड़ा मसाला
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के ‘तेल भंडार’ को विकसित करेगा और भविष्य में शायद पाकिस्तान भारत को भी तेल बेचे। इस बयान को लेकर पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया गया। एक यूजर ने लिखा, “हमें तो ट्रंप के ट्वीट से ही पता चला कि हमारे पास तेल है!”
असल मंशा क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की तेल खोज की कहानियाँ अक्सर आर्थिक संकट के समय आती हैं, ताकि जनता का ध्यान हटाया जा सके और विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। इमरान खान के वक्त भी यही हुआ था, अब ट्रंप के बयान ने फिर से इस बहस को जगा दिया है।
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