गणेश जी की पत्नी का नाम क्या है? कैसे हुआ गणपति बप्पा का विवाह?
विघ्नहर्ता श्री गणेश जी का जन्म माता पार्वती के उबटन से हुआ था. गणपति बप्पा जब शिव जी को देवी पार्वती ने मिलने नहीं देते हैं, तो महादेव गुस्से में आकर उनका सिर काट देते हैं. बाद में उनको हाथी का सिर लगाया जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार गणेश जी का शरीर बेडौल था. उनका पेट निकला था, सिर हाथी का था. इससे वे काफी दुखी थे. इस वजह से उन्होंने ब्रह्मचारी रहने का निर्णय लिया था, लेकिन तुलसी जी ने उनको श्राप दिया था कि गणेश जी की दो पत्नियां होंगी. आइए जानते हैं कि गणेश जी की पत्नी का नाम क्या है? गणेश जी का विवाह कैसे हुआ?
गणेश जी की पत्नी का नाम
मंगलमूर्ति गणेश जी की पत्नी का नाम रिद्धि् और सिद्धि है. रिद्धि् और सिद्धि ब्रह्मा जी की मानस पुत्रियां हैं. रिद्धि समृद्धि, ऐश्वर्य और संपन्नता प्रदान करने वाली देवी हैं, जबकि सिद्धि सफलता, उपलब्धि और सिद्धि प्रदान करती हैं. गणेश जी के दो पुत्र शुभ और लाभ बताए गए हैं.
जब आप किसी भी कार्य का शुभारंभ गणेश जी के पूजन से करते हैं तो आपको रिद्धि् और सिद्धि की कृपा भी सहज मिल जाती है. गणपति पूजा से व्यक्ति को बुद्धि और शुभता के साथ सफलता, समृद्धि भी प्राप्त होती है.
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार तुलसी जी गणेश जी पर मोहित हो गईं. उन्होंने गणेश जी से विवाह करने की बात कही. तब तपस्या कर रहे गणेश जी ने उनके प्रस्ताव को नकार दिया. इससे तुलसी नाराज हो गईं. उन्होंने गणेश जी को श्राप दे दिया कि आपकी दो पत्नियां होंगी. इससे नाराज होकर गणेश जी ने तुलसी को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया. इस वजह से गणेश जी की पूजा में तुलसी का उपयोग नहीं करते हैं. तुलसी के श्राप की वजह से गणेश जी का विवाह रिद्धि् और सिद्धि से हुआ.
एक अन्य कथा के अनुसार, बेडौल शरीर के कारण गणेश जी दुखी थे कि उनसे कोई विवाह नहीं कर रहा. जहां भी विवाह होता तो गणेश जी उसमें बाधा डाल देते थे. उनके इस व्यवहार से सभी देवी और देवता परेशान हो गए. तो वे ब्रह्मा जी के पास इस समस्या को लेकर गए. ब्रह्मा जी ने अपनी दो पुत्रियों रिद्धि और सिद्धि को प्रकट किया.
वे रिद्धि् और सिद्धि को लेकर गणेश जी के पास गए. उन्होंने गणेश जी से उन दोनों को शिक्षा देने का आग्रह किया. गणेश जी रिद्धि् और सिद्धि को शिक्षा देने के लिए सहमत हो गए तो ब्रह्मा जी वहां से चले गए. अब गणेश जी के पास विवाह की कोई जानकारी आती तो रिद्धि् और सिद्धि उनका ध्यान भटका देती थीं. इससे दूसरों के विवाह होने लगे.
काफी समय व्यतीत होने पर गणेश जी को मालूम हुआ कि लोगों का विवाह हो रहा है. रिद्धि् और सिद्धि के कारण ऐसा हुआ है क्योंकि वे दोनों गणेश जी को दूसरे के विवाह में विघ्न डालने नहीं दे रही थीं. गणेश जी नाराज हुए, वे रिद्धि् और सिद्धि को श्राप देने जा रहे थे, तभी ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उनको रोका. ब्रह्मा जी ने गणेश जी के समक्ष रिद्धि् और सिद्धि से विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे वे मान गए. इसके बाद रिद्धि् और सिद्धि से गणेश जी का विवाह हुआ.
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