हिम्मत और जुनून का सफर— 16,000 किमी कार चला भोपाल पहुंचे इंजीनियर
भोपाल : 42 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर हुकुमचंद रतनचंद शाह ने लंदन से भोपाल तक की यात्रा सड़क मार्ग से तय की है। 16,000 किमी की यह दूरी उन्होंने 35 दिनों में पूरी की है। दो साल की तैयारी के बाद हुकुमचंद रतनचंद शाह ने लंदन से भोपाल तक के सफर को पूरा किया है। इस पर उन्होंने एक करोड़ रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने यह यात्रा भोपाल में अपनी पत्नी, बच्चों और ससुराल वालों के साथ 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए की है।
नेपाल में छोड़नी पड़ी कार
दरअसल, उनके दोस्त, सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिजीत पाटिल भी उनके साथ थे। नेपाल में भूस्खलन के कारण रास्ता बंद हो जाने से शाह को अपनी कार वहीं छोड़नी पड़ी। अब वह उसे वापस लाने के लिए 2,000 किलोमीटर की अतिरिक्त यात्रा करेंगे। शाह की इस यात्रा में कुल 1 करोड़ रुपये का खर्च आया।
35 दिन में 16000 किमी का सफर
हुकुमचंद रतनचंद शाह ने लंदन से भोपाल तक कार से एक लंबा सफर तय किया। यह सफर 16,000 किलोमीटर का था और इसे पूरा करने में 35 दिन लगे। शाह ने इस यात्रा पर 1 करोड़ रुपये खर्च किए। शाह ने कहा कि यह यात्रा यादगार थी। हमने भारत पहुंचने से पहले 19 देशों की यात्रा की। यह मेरा सालों पुराना सपना था जो अब पूरा हो गया है।
पत्नी लंदन के बैंक में करती है काम
उनकी पत्नी, ऋचा शाह, जो लंदन में एक बैंक में काम करती हैं, बच्चों के साथ पहले ही भोपाल पहुंच चुकी थीं। ऋचा ने कहा कि मेरे पति ने एक अद्भुत अभियान किया है। हमें उन पर गर्व है।
चीन होते हुए आए यहां
शाह ने अपनी यात्रा के बारे में कहा कि उनके अभियान को सभी देशों में सराहा गया। उन्होंने कहा कि सभी ने हमें बहुत प्रोत्साहित किया। हमने चीन में लगभग 12 दिनों तक यात्रा की और वहां के लोगों ने हमारे साथ बहुत सम्मान से व्यवहार किया।
75 लाख में खरीदी नई कार
इस यात्रा के लिए, शाह ने पिछले साल लगभग 75 लाख रुपए में एक नई कार खरीदी थी। शाह ने कहा कि कार के अलावा, हमारा यात्रा खर्च लगभग 35 लाख रुपए था। महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले शाह ने पहले भारत में पुणे से लद्दाख तक कई यात्राएं की हैं। शाह की यात्रा भारत और लंदन के बीच होने वाली लंबी सड़क यात्राओं के चलन का हिस्सा है। 'रोड टू लंदन' जैसे कई संगठित अभियान 2017 से हो रहे हैं। इन यात्राओं में आमतौर पर 20 देशों में 16,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी 50-65 दिनों में तय की जाती है।
ये यात्राएं सांस्कृतिक खोज, मुश्किलों और व्यक्तिगत उपलब्धि का मिश्रण हैं। गौरतलब है कि शाह ने इस यात्रा के लिए बहुत तैयारी की और काफी पैसे खर्च किए। नेपाल में परेशानी होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और यात्रा पूरी की।
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