नक्सली गढ़ में जवानों का सर्जिकल ऑपरेशन, संगठन बदलते ही 8 लाख के इनामी टॉप कमांडर को किया ढेर, इलाके में मची खलबली
कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक इनामी नक्सली को मार गिराया है। जिले के परतापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत गेड़ाबेड़ा गांव के जंगल में सुरक्षाबलों ने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के मिलिट्री कंपनी नंबर पांच के सदस्य मासा को मुठभेड़ में मार गिराया है। मासा के सिर पर आठ लाख रूपये का इनाम घोषित था। बता दें कि हाल ही में दावा किया गया है कि नक्सलियों ने अपने संगठन में बदलाव किया है। देवजी को नक्सली संगठन का महासचिव बनाया गया है जबकि हिड़मा को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। बुधवार को कांकेर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईके एलिसेला ने बताया कि सात सितंबर को कांकेर-नारायणपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के जंगल में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के संयुक्त दल को नक्सल विरोधी अभियान पर रवाना किया गया था। एलिसेला ने बताया कि अभियान के दौरान मंगलवार नौ सितंबर को परतापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत गेड़ाबेड़ा गांव के जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई।
हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद
उन्होंने बताया कि मुठभेड़ के बाद घटनास्थल की तलाशी ली गई तो वहां एक नक्सली का शव, एक .303 राइफल, एक वॉकी टॉकी सेट और अन्य सामान बरामद किया गया। अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए नक्सली की पहचान मासा के रूप में हुई है। मासा की गिनती नक्सलियों के टॉप कमांडर में होती थी और कई अपराधों में शामिल था।
खराब मौसम के बाद ऑपरेशन
बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम के बावजूद बस्तर में तैनात पुलिस और सुरक्षा बल के कर्मी भारत सरकार तथा छत्तीसगढ़ शासन की मंशा और बस्तरवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप जान-माल की सुरक्षा के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं। सुंदरराज ने माओवादियों से अपील की है कि वे यह यथार्थ स्वीकार करें कि माओवाद समाप्ति के कगार पर है और अब समय आ गया है कि वे हिंसा का मार्ग त्याग कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि यदि वे अवैध और हिंसक गतिविधियां जारी रखते हैं, तो उन्हें कठोर परिणाम भुगतने होंगे। इस कार्रवाई के साथ, इस वर्ष अब तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में 231 नक्सली मारे जा चुके हैं। इनमें से 210 बस्तर संभाग में मारे गए, जिसमें बीजापुर, बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिले शामिल हैं।
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