“कानपुर: वक्फ की ज़मीन हड़पने वाले पुलिस इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी, अखिलेश दुबे को कुचलने की साजिश विफल”
कानपुर: यूपी के कानपुर में अधिवक्ता अखिलेश दुबे मामले की जांच की आंच पुलिस विभाग में उनके मददगारों तक पहुंच गई है। वक्फ की तीन बीघा बेशकीमती जमीन हथियाने के मामले में अखिलेश दुबे के सहयोगी निलंबित इंस्पेक्टर सभाजीत मिश्रा को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था। सभाजीत ने अखिलेश दुबे के खिलाफ पैरवी करने से रोकने के लिए शिकायतकर्ता को ट्रक से कुचलवाने का प्रयास किया था। इतना ही नहीं उसने अखिलेश दुबे को पांच लाख रुपए देने का दबाव भी बनाया था। शनिवार को जेल भेजा जाएगा। सिविल लाइंस में नवाब मंसूर अली की करीब तीन बीघा जमीन थी। उन्होंने वर्ष 1992 में इसे शेख फखरुद्दीन हैदर को बेच दी थी। फखरुद्दीन के संतान नहीं थी, तो उन्होंने जमीन वक्फ को देदी थी। एग्रीमेंट हुआ कि जमीन की देखरेख (मुतवल्ली) करने वाला उनका ही वंशज हुआ था। वर्ष 1911 में इस जमीन का पट्टा 99 वर्ष के लिए फखरुद्दीन हैदर के चचेरे भाई हाफिज हलीम के नाम कर दिया गया। बाद में इस जमीन पर छह से सात किरायदार बस दिए गए। पट्टे की अवधि वर्ष 2000 में समाप्त हो गई।
मामला कोर्ट पहुंचा तो गैंग हुआ सक्रिय
फखरुद्दीन के पांचवीं पीढ़ी के वंशज मोइनुद्दीन आसिफ जाह किरायदारों को निकालना चाहते थे। मामला कोर्ट में भी पहुंचा तो इसके बाद अखिलेश दुबे गैंग सक्रिय हो गया। अखिलेश दुबे ने कई किरायदारों को डरा धमका कर और कुछ को रुपयों का लालच देकर अपने नाम पवार ऑफ अटॉर्नी करा ली। एक किरायदार मुन्नी देवी की 2015 में मौत हो गई। उन्हीं की नाम की दूसरी महिला को खड़ा कर शेष बची जमीन की भी पवार ऑफ अटॉर्नी करा ली।
पीड़ित को धमकाया
इस जमीन पर अखिलेश दुबे ने आगमन गेस्ट हाउस और अपना कार्यालय बनाया। कुछ जगह किराए पर उठा दी। शेख फखरुद्दीन की पांचवीं पीढ़ी के 80 वर्षीय मोइनुद्दीन आसिफ जाह ने वक्फ बोर्ड में इसकी शिकायत की। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2024 में अखिलेश दुबे के साथी शिवांश सिंह को लेकर इंस्पेक्टर सभाजीत उनके पास आया और पैरवी बंद करने की धमकी दी। उसने दबाव बनाया कि अखिलेश दुबे को पांच लाख भेजो नहीं तो फर्जी मुकदमे में फंसा देंगे। जब कोर्ट की शरण ली तो सभाजीत ने फिर ढंकी दी।
ट्रक से कुचलवाने की कोशिश
लखनऊ जाते समय आरोपियों ने उन्हें ट्रक से कुचलवाने की कोशिश की। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई। एसआईटी ने जांच की तो फर्जीवाड़ा सामने आया। बीते 13 अगस्त को अखिलेश दुबे, उनकी भतीजी, भाई सर्वेश दुबे, जय प्रकाश दुबे, शिवांश सिंह, राजकुमार शुक्ला और इंस्पेक्टर सभाजीत के खिलाफ ग्वालटोली थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद सभाजीत को निलंबित कर दिया गया था। वह भदोही का रहने वाला है और 1992 बैच का दारोगा है। प्रमोशन के बाद इंस्पेक्टर बन गया।
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