मुल्तान के गांव से लेकर अलीगढ़ की भूमि तक: बांके बिहारी जी की प्राचीन संपत्तियों की इतिहास में दर्ज दान-नामाएँ”
मथुरा: बांके बिहारी मंदिर की संपत्ति का सर्वे जल्द शुरू होगा। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनी मंदिर प्रबंधन कमेटी चल-अचल संपत्तियों की सूची तैयार करेगी। बताया जा रहा है कि बांके बिहारी मंदिर की संपत्ति वृंदावन के अलावा पाकिस्तान में भी है। कई ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। मंदिर की संपत्तियों का प्रबंधन प्रबंधकीय उपेक्षा और सामाजिक उदासीनता के कारण ठीक से नहीं हो पा रहा है इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी बताते हैं कि बांके बिहारी को उनके प्राकट्यकाल से लेकर अब तक बहुत सी चल-अचल संपत्तियां दान में प्राप्त हुई हैं। भूमि, भवन, मंदिर, खेत, कीमती आभूषण आदि भेंट करने वाले भक्तों में हिंदू राजा-महाराजाओं के साथ-साथ मुस्लिम नवाबों के नाम भी शामिल रहे हैं। प्रबंधकीय उपेक्षा की वजह से देश-विदेश में मौजूद अरबों रुपये की तमाम प्राचीन ऐतिहासिक संपत्तियां बेकार पड़ी हैं।
जयपुर नरेश ने तीन एकड़ जमीन दी
बांके बिहारी मंदिर को वर्ष 1592 में जयपुर नरेश सवाई महाराजा मानसिंह ने तीन एकड़ जमीन दान दी थी। 1594 में मुगल सम्राट अकबर ने 25 बीघा जमीन वृंदावन और राधाकुंड में दान की थी। 1595 में हरिराम व्यासात्मज किशोरदास द्वारा किशोरपुरा भूखंड दान में दिया गया। 1596 में मित्रसेन कायस्थ व उनके सुपुत्र बिहारिनदास नामक भक्त ने बिहारिनदेव टीलावाली भूमि दान की।
ग्वालियर रियासत ने आभूषण दिए दान में
वर्ष 1748 में जयपुर नरेश सवाई महाराजा ईश्वरीसिंह ने 1.15 एकड़ जमीन दान दी। वर्ष 1769 ई. में भरतपुर और करौली सरकार द्वारा भूमिदान किया गया। 1780 ई. में विंध्याचल राजपरिवार ने भूमि व बहुमूल्य आभूषण दान किए। 1785 में ग्वालियर रियासत ने भूमि-भवन व आभूषण दान किए।
राजस्थान और कोलकाता में जमीन
साल 1960 में राजस्थान के भक्त परिवार ने कोटा में 90 बीघा जमीन दान दी। वर्ष 2005 के आसपास कोलकाता के एक भक्त ने वृंदावन में अपने मकान को सहर्ष दान किया है। बांके बिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी द्वारा प्रकाशित श्रीस्वामी हरिदास अभिनंदन ग्रंथ, केलिमालजु, कृपा कोर, कथा हरिदासबिहारी की, मथुरा ए डिस्ट्रिक्ट मेमोयर, ब्रजभूमि इन मुगल टाइम्स सहित अनेक पुरातन अभिलेखों में इन संपत्तियों के प्रमाण दर्ज हैं।
मुल्तान में घर और खेत मिला था दान में
वर्ष 1440 में पंजाब प्रांत में आने वाले मुल्तान जिले के उच्चग्राम में हरिदासजी के प्रपितामह विष्णुदेवजी को सियालकोट निवासी शिष्य लक्ष्मीनारायण वर्मा ने एक घर व खेत दान में दिए थे। 1485 में हरिदासजी के पितामह गजाधरजी को मुल्तान के तत्कालीन लंगाह सल्तनत के शासक शाह हुसैन ने पांच गांव दान किए थे।
अलीगढ़ के गुर्जर राजा ने पांच गांव दान दिए थे
सन 1525 में हरिदासजी के पिता आशुधीरजी को हरिगढ़ (अलीगढ़) के तत्कालीन गुर्जर राजा ने हरिदासपुर सहित पांच गांव दान दिए थे। दिल्ली के फराशखाने में मंदिर, भवन, वर्तमान पाकिस्तान के मुल्तान, शक्कर सिंध एवं सियालकोट में मंदिर-हवेली आदि तो अत्यंत ऐतिहासिक और पुरातन हैं। इन सभी स्थानों का प्रमाणित विवरण अनेक ग्रन्थों में उपलब्ध है। यह सर्वे मंदिर की संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन में मदद करेगा।
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