अब और ताकतवर बनेगा एस-400 आसमान में करीब 40 किमी एरिया को बना देगा अभेद
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर में धूम मचाने वाले एस-400 ने पाकिस्तान के किसी भी मंसूबे को सफल नहीं होने दिया था। भारत का जबरदस्त सुरक्षा कवच कहा जाने वाला एयर डिफेंस सिस्टम अब और अधिक ताकतवर होने जा रहा है। यह सिस्टम आसमान में 40 किमी के दायरे को ऐसा अभेद किला बना देगा। आसपास आने वाले फाइटर जेट, ड्रोन और हेलिकॉप्टर को वहीं के वहीं कुछ ही क्षणों में ध्वस्त कर देगा।
रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने रूस के साथ अतिरिक्त 40एन6 अल्ट्रा-लॉन्ग-रेंज इंटरसेप्टर मिसाइलों की खरीद को लेकर बातचीत शुरू कर दी है। यह मिसाइलें पहले से तैनात एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा होंगी। इससे एस-400 की ताकत में और इजाफा होगा। 40एन6 आसमान में ही बैलिस्टिक मिसाइल और फाइटर जेट को तबाह करने में सक्षम है। 40एन6 इंटरसेप्टर मिसाइल्स के बेड़े में शामिल होने से दुश्मनों के लिए भारत के हवाई क्षेत्र को भेद पाना काफी मुश्किल होगा। हवाई सीमा मजबूत किले की तरह अभेद्य हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि 40एन6 मिसाइलों की नई खेप भारत की सामरिक हवाई रक्षा पहुंच को और अधिक बढ़ा देगी। यह न केवल निगरानी और निवारक क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में महत्वपूर्ण ठिकानों, एयरबेस और कमांड सेंटरों को अतिरिक्त सुरक्षा भी प्रदान करेगी। इन मिसाइलों की तैनाती से भारत अपने विरोधियों के लिए हवाई ‘नो-गो जोन’ तैयार करने में और अधिक सक्षम होगा। कुल मिलाकर, अतिरिक्त 40एन6 मिसाइलों की संभावित खरीद भारत की रक्षा नीति में एक और बड़ा कदम है, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
बता दें कि भारत ने वर्ष 2018 में 5.43 अरब डॉलर की लागत से पांच रेजिमेंट एस-400 सिस्टम खरीदने का समझौता किया था। सितंबर 2025 तक भारत को चार रेजिमेंट मिल चुकी हैं और वे पूरी तरह से ऑपरेशनल हो चुकी हैं। पांचवीं रेजिमेंट 2026–27 तक मिलने की संभावना है। मौजूदा तैनाती भारत के पश्चिमी और पूर्वी मोर्चों को कवर करती है, जिससे पाकिस्तान और चीन दोनों से आने वाले हवाई खतरों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच तैयार हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि मई 2025 में भारतीय बलों ने सीमा के करीब ऑपरेट कर रहे पाकिस्तान के एक आईएसआर विमान को 40एन6 से निशाना बनाया था। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस हथियार को एक मजबूत डेटरेंस टूल (निवारक हथियार) के रूप में स्थापित करती है, खासकर उन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जो विवादित इलाकों में लंबे समय तक गश्त करते रहते हैं।
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