रायपुर में बना डिजिटल ट्राइबल म्यूजियम, QR कोड से जानें वीर नायकों की गाथा
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के मौके पर PM नरेंद्र मोदी रायपुर पहुंचे हैं. इस दौरान उन्होंने देश के पहले डिजिटल ट्राइबल म्यूज़ियम शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण किया. यह म्यूज़ियम उन आदिवासी वीर नायकों को समर्पित है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध अपने प्राणों की आहुति दी और छत्तीसगढ़ की अस्मिता की रक्षा की.
इस डिजिटल ट्राइबल म्यूजियम में शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय आदिवासी नायकों की वीरता, बलिदान और संघर्ष की कहानी बताएगा. 9.75 एकड़ में बने इस संग्रहालय को बनने में करीब 3 साल 5 महीने का समय लगा है.
50 करोड़ की लागत से बना डिजिटल संग्रहालय
डिजिटल म्यूजियम के निर्माण में लगभग 50 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. म्यूजियम में छोटी-बड़ी सब मिलाकर लगभग 40 से ज्यादा LED लगी हैं. यहां लोग अपने मोबाइल से QR कोड स्कैन कर हर गाथा को हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में सुन और देख सकेंगे.
स्वतंत्रता संग्राम नायकों को है समर्पित
इसकी डिज़ाइन, अवधारणा और तकनीकी संरचना आधुनिकतम मानकों पर आधारित है. संग्रहालय में अत्याधुनिक वीएफएक्स टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्शन सिस्टम, डिजिटल स्क्रीन की सुविधा उपलब्ध है, जिससे आगंतुक हर कथा को डिजिटल माध्यम से अनुभव कर सकेंगे. संग्रहालय परिसर में बिरसा मुंडा, रानी गाइडलो, गैंद सिंह, वीर गुण्डाधुर, सुकदेव पातर जैसे महान स्वतंत्रता संग्राम नायकों की प्रतिमा स्थापित की गई है.
ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले की सुविधा
12 आदिवासी विद्रोह और 2 सत्याग्रह की जीवंत झांकी दिखाई गई है. डिजिटल स्क्रीन, ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले और प्रोजेक्शन मैपिंग की सुविधा है.
यहां भविष्य में इंट्री के लिए शुल्क भी देना होगा. फिलहाल, सरकार की ओर से इसके लिए कोई शुल्क निर्धारण की जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन म्यूजियम के कैंपस में प्रवेश करने के लिए टिकट काउंटर और चेक प्वाइंट भी बनाए गए हैं. जहां टिकट लेने के बाद ही लोग प्रवेश कर पाएंगे.
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