1000 साल पुराना धेनुपुरीश्वरर मंदिर, जहां गाय बने कपिल मुनि ने की थी शिव आराधना, बड़ी रोचक है श्राप मुक्ति की कथा
सनातन धर्म और हमारे शास्त्रों में हमेशा मनुष्य जीवन को मोक्ष से जोड़ा गया है. मोक्ष प्राप्ति के लिए दान, पूजा-पाठ और अनुष्ठान करने के लिए कहा जाता है. चेन्नई शहर के पास एक ऐसा मंदिर है, जहां दुखों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं. ये मंदिर सिर्फ धर्म की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भारतीय पुरातत्व के लिए भी खास है.
1000 साल अधिक पुराना है धेनुपुरीश्वरर मंदिर
चेन्नई के मदंबक्कम और तांबरम के पास प्राचीन धेनुपुरीश्वरर मंदिर है, जिसे 1000 साल से भी ज्यादा पुराना बताया जाता है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें यहां मोक्ष के देवता के रूप में पूजा जाता है.
गर्भगृह में 6 इंच का शिवलिंग
मंदिर के गर्भगृह में 6 इंच के शिवलिंग विराजमान है, जिन्हें धेनुपुरीश्वर कहा गया है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव मां पार्वती के अन्य रूप ‘धेनुकंबल’ के साथ विराजमान हैं. भक्तों के बीच मान्यता है कि मंदिर में आकर धेनुपुरीश्वर और ‘धेनुकंबल’ की पूजा करने से सारे पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा की मानें तो महान ऋषि कपिल मुनि भगवान शिव के भक्त थे. उन्होंने बाएं हाथ से भगवान की आराधना की थी, जिसकी वजह से उन्हें अगले जन्म में गाय का जन्म लेने का श्राप मिला. गाय होकर भी कपिल मुनि ने लगातार भगवान शिव की आराधना की और मिट्टी में दबे शिवलिंग की पूजा की.
एक बार ग्वाले ने गाय को दूध अर्पित करने के लिए दंडित किया और इतना मारा कि उसके खुर से निकलने वाला रक्त शिवलिंग पर अर्पित हो गया. गाय की पीड़ा को कम करने के लिए भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और कपिल मुनि को श्राप से मुक्त किया. इसी वजह से मंदिर का नाम धेनुपुरीश्वरर पड़ा. यहां धेनु से तात्पर्य गाय से है.
शिवलिंग पर आज भी गाय के खुर का निशान
मंदिर में विराजमान छोटे से शिवलिंग पर आज भी गाय के खुर का निशान है और शिवलिंग को स्वयं प्रभु माना जाता है. शिवलिंग के पास एक गड्डा भी है. मंदिर में भगवान विष्णु भी विराजमान हैं, लेकिन वे मुख्य गर्भगृह के पीछे की तरफ स्थापित हैं.
धेनुपुरीश्वरर मंदिर की सुंदर वास्तुकला
मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है, क्योंकि मंदिर के हर खंभे पर चोल राजा सुंदर चोल के समय की नक्काशी है. मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमा बनी है, जो हाथों में बाण लिए खड़े हैं. इसके अलावा मंदिर में एक नक्काशी ऐसी भी है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु, सूर्य और भगवान गणेश की प्रतिमा एक साथ विराजमान है. इस नक्काशी को वहां के लोग शक्ति का प्रतीक मानते हैं.
इसके अलावा एक खंभे पर कपिल मुनि को अपनी बाईं भुजा में शिवलिंग और दाईं भुजा में माला धारण करते हुए दिखाया गया है. धेनुपुरीश्वरर मंदिर के पास ही 18 सिद्धों का मंदिर है और थोड़ी ही दूरी पर शुद्धानंद आश्रम भी देखने को मिल जाएगा.
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