मोक्षदा एकादशी का व्रत और पूजा से पितरों का होता है कल्याण, मोक्ष प्राप्ति के लिए कर लें बस ये 3 काम, जानें पूजा विधि
मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि कल यानी सोमवार के दिन पड़ रही है. यह एकादशी सर्वपाप विनाशिनी, मोक्ष प्रदान करने वाली, तथा पितृ-उद्धार कराने वाली मानी गई है. शास्त्रों में बताया गया है कि इस एकादशी का व्रत रखने से सभी जन्मों के पाप भी मिट जाते हैं और भक्त को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. यह एकादशी मन को सत्त्वगुणी बनाती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं. ज्योतिष शास्त्र में इस एकादशी का महत्व बताते हुए कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं. इन उपायों को करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही इस पवित्र एकादशी पर क्या दान करना चाहिए. आइए जानते हैं एकादशी की पूजा विधि और महत्व…
मोक्षदा एकादशी पंचांग 2025
द्रिक पंचांग के अनुसार, सोमवार के दिन इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा रात 11 बजकर 18 मिनट तक मीन राशि में रहेंगे. इसके बाद मीन राशि में गोचर करेंगे. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 8 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. भद्रा सुबह 8 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगा. पंचक काल सुबह 6 बजकर 56 मिनट से 11 बजकर 18 मिनट तक.
मोक्षदा एकादशी का महत्व
विष्णु पूजा, गीता पाठ और दान इस दिन विशेष रूप से मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करते हैं. मोक्षदा नाम इसीलिए पड़ा है क्योंकि कहा गया है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा पितरों को भी मोक्ष प्रदान करती है. यही कारण है कि लोग इस दिन भगवान विष्णु को समर्पित व्रत रखकर अपने पूर्वजों का कल्याण करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्री हरि ने अर्जुन को गीत का उपदेश दिया था, जिस वजह से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. इस दिन उपवास, पूजा और दान करने से पापों का नाश होता है और कई गुना फल मिलता है. यह एकादशी व्यक्ति को सांसारिक बंधनों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है.
मोक्षदा एकादशी व्रत विधि पूर्वक
मोक्षदा एकादशी पर व्रत विधि पूर्वक करना चाहिए. विधि-विधान से व्रत करने के लिए ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें. फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें. एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें. विष्णु भगवान की प्रतिमा स्थापित करें और अब भगवान को धूप, दीप, अक्षत और पीले फूल चढ़ाएं. व्रत कथा सुनें और भगवान विष्णु की आरती करें. उसके बाद आरती का आचमन करें. इसके बाद दिनभर निराहार रहें और भगवान का ध्यान करें. मंत्र जप और ग्रंथों का पाठ करें और शाम को तुलसी मैया पर दीपक जलाना न भूलें.
IPL 2026 स्टार पर चर्चा, अश्विन ने बताया सही रास्ता
IPL Moment: गिल के आउट होते ही सुयश का खास अंदाज वायरल
US-Iran Talks: ईरान ने साफ किया रुख, शर्तों के बिना बातचीत नहीं
1000 पेड़ों की जगह बचे सिर्फ 50, सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली पोल
रायपुर में ट्रैफिक का कड़ा पहरा, नियम तोड़ने वालों की खैर नहीं
डबल मर्डर केस में नया मोड़, रिश्तों की उलझनें सामने आईं
धार्मिक पहचान पर विवाद, BJP ने कांग्रेस सरकार को घेरा