बायोडेटा में लिखें सास ससुर नहीं चाहिए: कोर्ट
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली की फैमिली कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा, यदि सास ससुर नहीं चाहिए थे। तो इस बात का उल्लेख बायौडेटा में करना चाहिए था।
अपर प्रधान न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने तलाक के मामले की सुनवाई करते हुए महिला टीचर पर तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा अगर किसी महिला को सिर्फ पति के साथ ही रहना है। उसे अपने साथ सास ससुर या किसी रिश्तेदार को नहीं रखना है। ऐसी स्थिति में शादी के लिए जो बायोडाटा तैयार किया जाता है।उसमें साफ-साफ लिखना चाहिए। उसे ऐसा पति चाहिए, जिसका कोई रिश्तेदार ना हो।
फैमिली कोर्ट ने कारोबारी सुभाशीष सिंह की तलाक याचिका को मंजूर करते हुए यह टिप्पणी की है। शुभाशीष ने 2019 में दीक्षा वर्मा से शादी की थी।शादी के बाद दीक्षा को सास ससुर के साथ रहना पसंद नहीं था। उसने एक अलग घर की मांग पति से की। पति द्वारा अलग घर नहीं देने के कारण वह पति से अलग रहने लगी। जिसकी परिणति तलाक के रूप में हुई।
संसद में NEET विवाद पर बढ़ा सियासी टकराव, राहुल गांधी की बैठक से क्या निकलेगा हल?
CJP प्रोटेस्ट विवाद: सरकार ने कहा- संवाद के रास्ते खुले, 4 बार भेजा बातचीत का न्योता
हापुड़ में 6 साल की बच्ची से कथित दुष्कर्म प्रयास, पुलिस ने दर्ज किया केस
शिक्षा पर कितना निवेश, कितना बदलाव? मोदी सरकार के 12 साल का डेटा आया सामने
झाबुआ रेल विवाद: 6 घंटे इंतजार के बाद यात्रियों ने रोका ट्रैक, बोले- लोकल को दी जा रही प्राथमिकता
'युवा सीधे संवाद चाहते हैं', विक्रमादित्य सिंह ने PM मोदी को दिया सुझाव
₹35 हजार का जुर्माना और 1000 लोगों को भोज, छत्तीसगढ़ से सामने आया चौंकाने वाला मामला
आलिया भट्ट, माधवन समेत कई सेलेब्स आए छात्रों के समर्थन में, सोशल मीडिया पर रखी राय