प्रदूषण पर CJI का 'ऐतिहासिक' बयान! "पैसे वाले पैदा करते हैं समस्या, गरीब चुकाता है कीमत", सुप्रीम कोर्ट में मचा बवाल
CJI Surya Kant On Air Pollution: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण के गंभीर संकट से जुड़े एक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है. देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदूषण की समस्या अमीर लोग पैदा करते हैं, लेकिन इसका खामियाजा गरीब और मजदूर वर्ग को भुगतना पड़ता है. उन्होंने इस स्थिति को ‘पर्यावरणीय न्याय’ (Environmental Justice) का मुद्दा बताया.
निर्देशों का पालन नहीं कर रही सरकारें
एमिकस क्यूरी अपराजिता सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकारें कोर्ट के निर्देशों को तब तक पूरी तरह लागू नहीं करतीं, जब तक कोर्ट सख्ती न दिखाए. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अत्यधिक प्रदूषण के बावजूद कुछ स्कूलों ने अपने खेल कार्यक्रम जारी रखे, जो दिखाते हैं कि नियम-कानून होने के बावजूद ज़मीन पर उनका पालन नहीं हो रहा है.
इस पर CJI सूर्यकांत ने सहमति व्यक्त की, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि कोर्ट अब केवल उन्हीं आदेशों को पारित करेगा जिन्हें वास्तव में लागू किया जा सके. उन्होंने कहा कि लाखों लोगों की आजीविका और जीवनशैली को नज़रअंदाज़ करके आदेश नहीं दिए जा सकते. उदाहरण के लिए, सभी वाहनों को अचानक रोक देना या निर्माण कार्यों पर पूर्ण पाबंदी लगाना व्यावहारिक नहीं है.
अमीरों की सुविधा, गरीबों की मजबूरी
CJI ने कहा कि अमीर वर्ग अपनी जीवनशैली बदलने को तैयार नहीं है. वे AC का इस्तेमाल करते हैं, बड़ी गाड़ियां चलाते हैं, जो प्रदूषण बढ़ाते हैं. लेकिन जब हवा जहरीली होती है, तो इसका सबसे बुरा असर उन गरीब मजदूरों पर पड़ता है जो खुले में काम करते हैं. ये लोग न तो घर के अंदर एयर प्यूरीफायर लगा सकते हैं और न ही महंगे N95 मास्क खरीद सकते हैं.
CJI ने सभी पक्षकारों से अपील की कि वे अपने सुझाव मीडिया में देने के बजाय मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे एमिकस क्यूरी को भेजें. यह गंभीर मामला अब बुधवार को तीन न्यायाधीशों की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आएगा, जहां प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी उपायों पर विचार किया जाएगा.
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