हाईकोर्ट ने DEO पर लगाई 10 हजार की कॉस्ट, डेढ़ दशक बाद भी नहीं हुआ सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान
जबलपुर: सेवानिवृत्ति देयक और पेंशन का भुगतान नहीं किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट जस्टिस एम एस भट्टी की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि उक्त याचिका साल 2010 में दायर की गई थी. पिछले आदेश में जीपीएफ से रुपए निकालने सहित अन्य कटौती के संबंध में जानकारी पेश करने निर्देश दिये थे,जिसका पालन नहीं किया गया.
एकलपीठ ने जानकारी पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय प्रदान करते हुए कोर्ट में उपस्थित जिला शिक्षा अधिकारी पर 10 हजार की कॉस्ट लगाई है. कॉस्ट की राशि जिला शिक्षा अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जमा करनी होगी.
2010 में दायर की गई थी याचिका
शिक्षा विभाग से रिटायर्ड प्रकाश नारायण शुक्ला की तरफ से साल 2010 में एक याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि सेवानिवृत्ति के बाद देयकों का भुगतान नहीं किया गया. उनकी पेंशन भी प्रारंभ नहीं की गई. जिसके कारण उनके परिवार को आर्थिक तंगी की समस्या से गुजरना पड़ रहा है. याचिकाकर्ता दिव्यांग है और कोई दया और अनुग्रह नहीं बल्कि सालों की सेवा के एवज में अर्जित वैध अधिकार का हकदार है.
हाईकोर्ट ने शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के जारी किए थे आदेश
याचिका में कहा गया था कि उसकी जीपीएफ राशि 65 हजार, 6वें वेतनमान की एरियर की राशि 1 लाख 7 हजार, अवकाश नगदीकरण के 1 लाख 70 हजार और ग्रेच्युटी ने 3 लाख 58 हजार रुपए का भुगतान नहीं किया गया है. पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जिला शिक्षा अधिकारी से निर्देश लेकर फरवरी 2011 के बाद पत्राचार के बाद की गई कार्यवाही के संबंध में शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये थे. इसके अलावा जीपीएफ कटौती का पूरा विवरण जुटाया गया और उसकी जानकारी लोक शिक्षण विभाग के संयुक्त निदेशक को भेजी गई.
'अगली सुनवाई में जानकारी पेश नहीं तो प्रमुख सचिव हों उपस्थित'
याचिका पर मंगलवार हो हुई सुनवाई के दौरान जबलपुर के जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुए. उन्होंने बताया कि पूरी जानकारी इकठ्ठी नहीं हो पाई है. उन्होंने एकलपीठ से 1 सप्ताह का समय प्रदान करने का आग्रह किया. एकलपीठ ने सुनवाई के बाद आदेश जारी करते हुए एक सप्ताह का समय प्रदान किया है. साथ ही पिछली जानकारी पेश नहीं करने पर 10 हजार की कॉस्ट लगाई है.
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अगली सुनवाई के दौरान जानकारी पेश नहीं की गई तो प्रमुख सचिव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर गलती के संबंध में जानकारी देंगे. याचिका पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धारित की है. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की.
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