खाद माफिया पर बड़ा एक्शन, 6 हजार छापे, 160 लाइसेंस रद्द
MP News: मध्य प्रदेश में खेती किसानी पर एक बार फिर कालाबाजारी, जमाखोरी और घटिया गुणवत्ता वाले खाद-बीज सप्लायरों का साया गहराता दिख रहा है. किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिलने की शिकायतों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा अभियान चलाते हुए कृषि आदानों की गुणवत्ता और भंडारण की व्यापक जांच कराई. अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक चले इस अभियान में प्रदेशभर में 6,000 से अधिक छापेमारी की गई, जिसमें 774 सैंपल घटिया गुणवत्ता के पाए गए. कार्रवाई के तहत 160 लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं.
जांच में क्या सामने आया?
कृषि विभाग की टीमों ने खरीफ सीजन के दौरान विशेष निगरानी रखी. जांच में सामने आया कि कई जिलों में खाद और बीज की कृत्रिम कमी पैदा कर ऊंचे दामों पर बिक्री की जा रही थी. जमाखोरी कर बाजार में संकट खड़ा किया गया, जिसका सीधा असर किसानों की जेब और फसल दोनों पर पड़ा. विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 204 मामलों में लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई गई, जबकि 729 से अधिक मामलों में केस दर्ज किए गए. 92 लोगों को आरोपी बनाया गया और 111 व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए. 1,073 व्यापारियों को नोटिस जारी किए गए हैं. चार मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की गई.
नकली खाद-बीज से खेतों में ‘सन्नाटा’
जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि कई इलाकों में नकली या निम्न गुणवत्ता वाले बीजों के कारण अंकुरण ही नहीं हुआ. किसानों ने शिकायत की कि बोवनी के बाद फसल जमीन से निकली ही नहीं, जिससे उन्हें दोबारा बुवाई करनी पड़ी. पिछले साल असमय बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से पहले ही नुकसान झेल चुके किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर साबित हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावटी खाद और घटिया बीज न केवल उत्पादन घटाते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी प्रभावित करते हैं.
कृषि विभाग का क्या कहना है?
- कृषि विभाग का कहना है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है.
- इसी के तहत विशेष जांच दल गठित किए गए और नियमित सैंपलिंग कराई गई.
- विभाग ने स्पष्ट किया है कि कालाबाजारी और जमाखोरी में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.
- आने वाले रबी और खरीफ सीजन को देखते हुए निगरानी और कड़ी की जा रही है.
- हालांकि सवाल यह उठता है कि हर सीजन में छापेमारी और लाइसेंस निरस्तीकरण के बावजूद बाजार में नकली और घटिया कृषि आदान कैसे पहुंच जाते हैं.
निगरानी तंत्र पर सवाल मिली
क्या निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं ढील है या फिर माफिया नेटवर्क इतना मजबूत है कि कार्रवाई के बाद भी दोबारा सक्रिय हो जाता है. फिलहाल, 6 हजार से ज्यादा छापों और सैकड़ों लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद प्रदेश का किसान यही उम्मीद कर रहा है कि इस बार कार्रवाई कागजों तक सीमित न रह जाए, बल्कि खेत तक उसका असर दिखे. क्योंकि खेती में भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी है और जब खाद-बीज पर से भरोसा उठने लगे, तो संकट सिर्फ फसल का नहीं, पूरे कृषि तंत्र का बन जाता है.
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