चैत्र माह की शुरुआत कब से है? हिंदू नववर्ष के पहले महीने में क्या करें, क्या न करें
चैत्र माह पंचांग या फिर कहें कि हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है. यह पूजा पाठ और व्रत की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर चित्रा नक्षत्र का शुभ संयोग बनता है, इसकी वजह से इस माह का नाम चैत्र है. चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपद तिथि से हिंदू नववर्ष का प्रारंभ होता है. उस दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत भी होती है. चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान राम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे राम नवमी कहते हैं. पंचांग से जानते हैं कि चैत्र माह की शुरुआत कब से हो रही है? चैत्र महीने में क्या करें और क्या न करें?
चैत्र माह की शुरुआत कब?
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 3 मार्च दिन मंगलवार को शाम में 05 बजकर 07 मिनट से से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 4 मार्च दिन बुधवार को शाम में 04 बजकर 48 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर चैत्र माह की शुरुआत 4 मार्च बुधवार को होगी.
धृति योग और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में चैत्र का प्रारंभ
इस साल चैत्र माह का शुभारंभ धृति योग और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में होगा. चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के दिन धृति योग प्रात:काल से लेकर सुबह 08 बजकर 52 मिनट तक है, उसके बाद से शूल योग प्रारंभ होगा. उस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 07 बजकर 39 मिनट तक है. उसके बाद से उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है.
धृति योग को शुभ योग माना जाता है. इस योग में आप जो कार्य करते हैं, उसमें स्थिरता प्राप्त होती है. वहीं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी ग्रह शुक्र हैं और इस नक्षत्र के देवता भग हैं, जो भाग्य और दांपत्य सुख के कारक हैं. वहीं शूल योग को अशुभ और कष्टकारक माना गया है. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र भी स्थिर और शुभ होता है.
चैत्र माह में क्या करें?
चैत्र माह से ऊर्जा और नवीनता का प्रारंभ होता है. इस वजह से आप व्रत और पूजा पाठ करें.
चैत्र में पापमोचनी एकादशी आएगी. इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है, इसलिए यह व्रत सभी को करना चाहिए.
चैत्र के समय में गर्मी बढ़ने लगती है. इस वजह से इस माह में अधिक पानी पिएं और फल खाएं.
चैत्र के महीने में चने का सेवन करना चाहिए. इससे आपकी सेहत ठीक रहेगी.
चैत्र के शुक्ल पक्ष में प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रि रहेगी, उस समय व्रत रखें और मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा करें. दुर्गासप्तशती का पाठ या दुर्गा मंत्र का जाप शुभ फलदायी होगा.
नाम, यश, पद, प्रतिष्ठा में बढ़ोत्तरी के लिए चैत्र माह में सूर्य देव की पूजा करें. लाल रंग के फल का दान करें.
चैत्र माह में क्या न करें?
चैत्र के महीने में गुड़ खाना वर्जित होता है. आयुर्वेद में इस बात का वर्णन विस्तार से बताया गया है.
चैत्र में बासी भोजन न करें. गर्मी के कारण रखा गया भोजन खराब हो सकता है, जिसे खाने से तबीयत खराब हो सकती है.
चैत्र में मांस, मदिरा या अन्य तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए.
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