मनरेगा योजनाओं में हितों के टकराव से बचाव के कदम
लखनऊ|उत्तर प्रदेश सरकार ने मनरेगा और विकसित भारत-रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के तहत वेंडर पंजीकरण के नियमों में बदलाव किया है। अब इन योजनाओं में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवार की फर्मों को वेंडर के रूप में पंजीकरण नहीं मिलेगा। ग्राम्य विकास विभाग ने इसके लिए नई गाइडलाइन जारी की है।डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने निर्देश दिए हैं कि मैटेरियल, ईंधन, स्टेशनरी और अन्य सेवाओं की आपूर्ति में पारदर्शिता रखी जाए। किसी भी तरह की अनियमितता या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास विभाग के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ करें। उन्होंने वीबी- जीरामजी के कार्यों और उनमें उपयोग होने वाली सामग्री की आपूर्ति से संबंधित दिशा-निर्देशों पर पूरी तरह से अमल न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।इस संबंध में जिलाधिकारियों (डीएम) और जिला कार्यक्रम समन्वयकों को पहले से पंजीकृत फर्मों की दोबारा जांच करने को कहा गया है। नई गाइडलाइन के अनुसार ब्लॉक प्रमुख, बीडीओ, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और अन्य संबंधित कर्मचारियों के परिवार की फर्मों पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार का उद्देश्य योजनाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
मल्हार में खुली छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की नई शाखा
विश्व कप के रण में मध्यप्रदेश का गौरव: हॉकी इंडिया की विश्व कप टीम में हॉकी अकादमी के एसोसिएट खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद का चयन
मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी कार्रवाई
स्वस्थ पशुधन, समृद्ध किसान: मुंगेली में 582 शिविरों से बदली पशुपालन की तस्वीर
बालोद में असर दिखा रही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
प्रत्येक विधानसभा में खुलेगी "कृषि यंत्र किराये की दुकान"
राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाना जागरूक नागरिक की पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
कुछ घंटे पहले टली बैठक, फिर बदला कार्यक्रम; पंजाब कांग्रेस में आज होगी अहम बैठक
अनशन समाप्त करने को तैयार सोनम वांगचुक, सरकार के सामने रखी बड़ी शर्त