रंग पंचमी को देवताओं की होली क्यों कहा जाता है? ये अनुष्ठान घरों और मंदिरों में किए जाते हैं।
रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च दिन रविवार को धूमधाम से मनाया जाएगा, हर वर्ष यह पर्व होली के पांचवे दिन यानी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. रंग पंचमी को देव पंचमी भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर आकर भक्तों के साथ धूमधाम से होली खेलते हैं. रंग पंचमी का पर्व ब्रज में 40 दिन तक लगातार चलने वाली होली के समापन के तौर पर भी मनाया जाता है. हिंदू धर्म में जिस तरह कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दिवाली मनाई जाती है, ठीक उसी तरह रंग पंचमी को देवताओं की होली मनाई जाती है. इस दिन मंदिरों और घरों में कुछ खास अनुष्ठान किए जाते हैं. आइए जानते हैं रंग पंचमी का महत्व…
रंग पंचमी का महत्व
रंग पंचमी को कृष्ण पंचमी और देव पंचमी के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी और गोपियों के साथ होली खेली थी इसलिए सभी देवी-देवता इस दिन पृथ्वी पर होली खेलने आते हैं. चंदन, हल्दी समेत सभी तरह के फूलों से बने रंग को आसमान में उड़ाते हैं और कृष्ण लीला का आनंद लेते हैं. यह पर्व मुख्यत: ब्रज, राजस्थान, इंदौर समेत कुछ ही जगहों पर मनाया जाता है
होली की विदाई का पर्व रंग पंचमी
रंग पंचमी के दिन मंदिरों और घरों में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं, जिसमें नृत्य, संगीत और खेल शामिल हैं. रंग पंचमी का त्योहार सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है. रंगों के माध्यम से सभी लोग एक दूसरे के करीब आते हैं और पुरानी दुश्मनियों को भूलकर एक नए सिरे से दोस्ती की शुरुआत करते हैं. इस अवसर पर लोग अपने घरों को सजाते हैं और स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं. रंग पंचमी का उत्सव बच्चों और बूढ़ों, सभी के लिए यादगार होता है. इस दिन की खुशियां हर चेहरे पर रंग भर देती हैं और हर दिल में उमंग जगाती हैं. रंग पंचमी पर होली खेलकर होली के पर्व को विदाई भी देते हैं.
रंग पंचमी पर मंदिरों और घरों में होते हैं ये अनुष्ठान
रंग पंचमी पर कृष्णजी के मंदिरों में धूमधाम से होली मनाई जाती है और विशेष झांकियों के दर्शन होते हैं.
इस दिन मंदिरों और अन्य जगहों पर सामूहिक रंगोत्सव होता है और घर के सदस्य शामिल होते हैं.
रंग पंचमी पर राधा-कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं और सबसे पहले गुलाल उनके चरणों में अर्पित करते हैं.
शहर-गांव व कस्बों में पारंपरिक गायन, नृत्य, लोक कार्यक्रम आदि आयोजित किए जाते हैं.
रंग पंचमी पर घरों में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं.
रंग पंचमी को एक दूसरे को गुलाल लागकर बधाईयां देते हैं और होली की विदाई भी करते हैं
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