सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं तो होगी कार्रवाई: छिंदवाड़ा नगर निगम ने कंपनियों को दी सख्त चेतावनी
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा सहित विभिन्न जिलों में गर्मी बढ़ रही है. बढ़ती गर्मी में शॉर्ट सर्किट और ओवरहीटिंग के कारण कई जगहों पर आग लगने की भी घटनाएं सामने आने लगी हैं. बीते दिनों पांढुर्णा जिले के धनपेठ बाईपास स्थित खड़क नदी के पास एक कबाड़ की दुकान में भीषण आग लग कई. जिसमें करीब 10 लाख रुपए से अधिक का सामान जलकर खाक हो गया.
अर्लट मोड में फायर विभाग
गर्मी में बिजली का लोड बढ़ने से शॉर्ट सर्किट और ओवरलोडिंग की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. छिंदवाड़ा में लगातार आगजनी की बढ़ती घटनाओं के बाद फायर विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं. फायर विभाग ने दावा करते हुए कहा कि हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.
छिंदवाड़ा के लहेगडूआ और इमलीखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में करीब 50 कंपनियां मौजूद है. आरोप है कि यहां गिनी चुनी कंपनियों को छोड़कर अधिकांश कंपनियों के पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट नहीं हैं.
सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी
छिंदवाड़ा के इमलीखेड़ा और लहेगडूआ में औद्योगिक क्षेत्र इकाई बनाई गई है. जहां करीब 50 कंपनिया संचालित हो रही हैं. कंपनी संचालित करने के लिए सरकार द्वारा लीज पर जमीन दी गई है. लेकिन आरोप है कि आपातकाल स्थिति में लगभग 10 कंपनियों को छोड़कर, अधिकतर के पास दुर्घटना पर नियंत्रित करने के लिए किसी प्रकार के संसाधन नहीं हैं.
कंपनियों को सील करने की चेतावनी
नगर पालिका निगम के सहायक फायर ऑफिसर अभिषेक दुबे ने बताया, "सभी कंपनियों को नगर निगम द्वारा नोटिस जारी कर साफ-साफ बताया गया है कि कंपनी में NBC 2016 गाइडलाइन के मुताबिक उपकरण लगाकर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लें. अगर ऐसा नहीं होता है तो कमिश्नर के आदेश के अनुसार उन कंपनियों की लीज डेट समाप्त या सील की कार्रवाई की जाएगी."
फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के बगैर चल रही कंपनियां
औद्योगिक क्षेत्र इमलीखेड़ा में बीते 23 जनवरी को एक पाइप फैक्ट्री में भीषण आग की घटना हुई थी. जिसमें लाखों रुपए का सामान जलकर खाक हो गया था. दुर्घटनाग्रस्त कंपनी में अग्नि सुरक्षा के किसी प्रकार के कोई उपकरण नहीं थे और ना ही फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट.
'फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूरी'
असिस्टेंट फायर ऑफिसर अभिषेक दुबे ने बताया, "NBC 2016 गाइडलाइन टेबल नंबर 4 के अनुसार, फायर सेफ्टी उपकरणों को बिल्डिंग की ऊंचाई, उपयोगिता और अन्य मापदंड के अनुसार सुरक्षा उपकरण लगाना होता है. नगरीय प्रशासन से विभाग अधिकृत फायर कंसल्टेंट के द्वारा फायर प्लान बनाया जाता है उसे ऑनलाइन माध्यम से मध्य प्रदेश ई-नगर पालिका पोर्टल पर सबमिट कर देते हैं फिर अधिकारी दस्तावेजों की जांच के बाद प्लान अप्रूव करता है."
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