‘सफेद सोना’ से संवरेंगी ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, छत्तीसगढ़ के इस जिले में नई पहल
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ ‘सफेद सोने’ यानी मखाने की चमक भी दिखाई देगी. नगरी वनांचल की उन छोटी-छोटी डबरियों और तालाबों में अब सिर्फ पानी नहीं, मखाना लहलहाएगा. इसे लेकर धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र में आजीविका संवर्धन की एक अनूठी पहल के तहत मखाना खेती की तैयारी शुरू कर दी गई है|
छत्तीसगढ़ में उगेगा ‘सफेद सोना’
छत्तीसगढ़ के इस आदिवासी बहुल इलाके की महिलाओं के लिए मखाना खेती आत्मनिर्भरता की एक नई उम्मीद लेकर आई है. अब तक जिन जल निकायों का उपयोग सीमित था, वहां महिला स्व-सहायता समूह मखाना उगाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगी. मखाने की खेती की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी कम लागत है. पिछली फसल के गिरे हुए बीजों से ही नए पौधे अपने आप अंकुरित हो जाते हैं, जिससे हमारे वनांचल की मेहनत कश बहनों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा|नगरी क्षेत्र की आबोहवा और यहां का प्राकृतिक वातावरण मखाने की मिठास के लिए बिल्कुल वैसा ही है जैसा बिहार के मिथिलांचल में होता है. विशेषज्ञों की मानें तो संकरा और आसपास के इलाकों की जलवायु इस बेशकीमती फसल के लिए वरदान साबित हो सकती है|
‘मखाना हब’ बनेगा धमतरी
प्रशासन ने इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए जिले में 100 एकड़ जमीन को मखाना उत्पादन के लिए चुना है. शुरुआती दौर में संकरा के 25 एकड़ रकबे में मखाने की फसल तैयार करने की हलचल शुरू हो चुकी है. यह केवल खेती नहीं, बल्कि वनांचल के खेतों में होने वाला एक ऐसा नवाचार है जो आने वाले समय में धमतरी की पहचान पूरे प्रदेश में ‘मखाना हब’ के रूप में कराएगा|
ग्रामीण महिलाओं की चमकेगी किस्मत, आय का भी होगा साधन
धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने खुद संकरा की जमीन पर उतरकर इस प्रोजेक्ट की बारीकियों को समझा और महिलाओं का हौसला बढ़ाया. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ मखाना उगाना नहीं, बल्कि धमतरी की महिलाओं को एक ऐसा बाजार देना है जहां उनकी मेहनत का सही मोल मिल सके. कृषि और उद्यानिकी विभाग को सख्त हिदायत दी गई है कि वे गांव-गांव जाकर बहनों को तकनीकी बारीकियां सिखाएं, ताकि जल प्रबंधन और फसल सुरक्षा में कोई कमी न रहे|
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