राज्यसभा चुनाव से पहले एमपी की सियासत गरम, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की चिंता
भोपाल। मध्यप्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। इनमें दो सीटें भाजपा के पास हैं, जिन पर डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं। वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते की है, जिस पर फिलहाल दिग्विजय सिंह सांसद हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं, जिसके बाद कांग्रेस में इस सीट के लिए कई दावेदार सामने आ गए हैं।
कांग्रेस में बढ़ी दावेदारी
दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद कांग्रेस के भीतर इस सीट के लिए कई नेताओं ने दावा ठोक दिया है। इनमें प्रमुख नाम हैं:
जीतू पटवारी – प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
मीनाक्षी नटराजन – पूर्व सांसद
कमलनाथ – पूर्व मुख्यमंत्री
अरुण यादव – पूर्व केंद्रीय मंत्री
कमलेश्वर पटेल – पूर्व मंत्री, विंध्य क्षेत्र का बड़ा चेहरा
सज्जन सिंह वर्मा और प्रदीप अहिरवार – दलित वर्ग के नेता
दलित वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने की मांग भी उठ रही है। इस संबंध में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पत्र लिखकर मांग की है।
कांग्रेस को क्यों है खतरा
कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा डर क्रॉस वोटिंग का है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक यदि 5–6 विधायक भी इधर-उधर हो गए तो कांग्रेस की सीट खतरे में पड़ सकती है। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से विधायकों को अगले चुनाव में टिकट और अन्य ऑफर देने की चर्चा भी पार्टी के अंदर चल रही है।
विधानसभा के आंकड़े
मध्यप्रदेश विधानसभा में फिलहाल भाजपा के पास 164 विधायक हैं। यदि भाजपा को एक-दो अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है तो उसके लिए समीकरण और मजबूत हो सकते हैं। कांग्रेस को आशंका है कि उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।
पहले भी हो चुकी है क्रॉस वोटिंग
2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग देखने को मिली थी। उस समय विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को अपेक्षा से काफी कम वोट मिले थे। अनुमान था कि उन्हें करीब 103 वोट मिलेंगे, लेकिन उन्हें केवल 79 वोट ही मिले। माना गया कि लगभग 19–20 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया था।
विपक्ष और भाजपा के बयान
इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा हमेशा तोड़फोड़ की राजनीति करती है, लेकिन कांग्रेस के विधायक मजबूत हैं और राज्यसभा सीट कांग्रेस की ही रहेगी। वहीं भाजपा विधायक अभिलाष पांडे का कहना है कि भाजपा के पास पर्याप्त विधायक हैं और पार्टी अपने संगठन और काम पर भरोसा करती है।
जीत का गणित
इस बार राज्यसभा चुनाव 230 विधायकों के गणित पर होगा। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में थोड़ी सी भी क्रॉस वोटिंग पूरे चुनाव का समीकरण बदल सकती है।
निष्कर्ष:
मध्यप्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर चुनाव से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर कई दावेदार हैं, वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 19 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हुई है।
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