कब है पापमोचनी एकादशी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
भारतीय सनातन परंपरा में एकादशी व्रत का बहुत विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं, जिनमें से प्रत्येक एकादशी का अपना अलग महत्व और फल बताया गया है. हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी पड़ती है. इन सभी एकादशी में व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इसी क्रम में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है. इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है. धार्मिक ग्रंथों में भी इस एकादशी को बेहद पुण्यदायी बताया गया है. इसलिए श्रद्धालु पूरे नियम और श्रद्धा के साथ इस दिन व्रत रखते हैं. भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं.
कब रखा जाएगा एकादशी का व्रत
कई लोगों को हर साल यह भ्रम रहता है कि आखिर पापमोचनी एकादशी किस दिन मनाई जाएगी. व्रत कब रखना चाहिए. ऐसे में इस बार की तिथि को लेकर देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने जानकारी दी है. उन्होंने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए बताया कि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 14 मार्च 2026 को सुबह 8 बजकर 10 मिनट से हो जाएगी. वहीं यह तिथि 15 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी.ज्योतिषाचार्य के अनुसार सनातन परंपरा में व्रत रखने के लिए उदयातिथि को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है. उदयातिथि का अर्थ है कि जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि पड़ती है, उसी दिन व्रत रखा जाता है. इस नियम के अनुसार इस वर्ष पापमोचनी एकादशी का मुख्य व्रत 15 मार्च 2026 रविवार को रखा जाएगा.
ऐसे करें पूजा, जानें विधि
पंडित नंद किशोर मुदगल बताते हैं कि इस दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर भगवान विष्णु के स्तोत्र का पाठ करनी चाहिए. व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूरे दिन सात्विक रहकर भगवान का स्मरण करते हैं. शाम के समय दीपक जलाकर आरती की जाती है और अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाता है.धार्मिक मान्यता के अनुसार पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से जीवन के कई कष्ट दूर होते हैं. जो लोग अपने जीवन में शांति, सुख और आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं, उनके लिए यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है.इसलिए श्रद्धालु इस दिन पूरी आस्था और विश्वास के साथ भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और उनसे जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
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