लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों का मोर्चा, 18 मार्च को आंदोलन
छत्तीसगढ़। में लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों ने आंदोलन की तैयारी तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने 18 मार्च को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस दौरान कर्मचारी राज्य सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन करेंगे।फेडरेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक उन पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के चलते कर्मचारियों में नाराजगी है और मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। फेडरेशन के अनुसार प्रमुख मांगों में केंद्र के समान महंगाई भत्ता (डीए) देने, गृह भाड़ा भत्ता (एचआरए) में बढ़ोतरी, वेतन विसंगतियों का समाधान, पुरानी पेंशन योजना से जुड़ी समस्याओं का निराकरण और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी प्रशासन के माध्यम से सरकार को सौंपेंगे। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। फेडरेशन का कहना है कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की मांगें
- फेडरेशन ने 8, 16, 24 और 32 वर्ष में चार स्तरीय समयमान वेतनमान और अर्जित अवकाश के नगदीकरण की सीमा बढ़ाकर 300 दिन करने की मांग की है.
- इसके अलावा पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, शिक्षकों की पहली नियुक्ति तिथि से सेवा गणना.
- सहायक शिक्षकों व सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान,
- अनुकंपा नियुक्ति पर 10% सीमा खत्म करने,
- पंचायत सचिवों का शासकीयकरण, निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन,
- सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, संविदा व दैनिक वेतनभोगियों का नियमितीकरण और रिक्त पदों पर भर्ती की मांग भी उठाई गई है
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