अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर सियासत तेज, कांग्रेस बनाम केंद्र आमने-सामने
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने संसद में पेश किए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदायों और सामाजिक-धार्मिक संगठनों को निशाना बनाने की कोशिश है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेणुगोपाल ने कहा कि यह कानून अल्पसंख्यकों के सिर पर तलवार की तरह लटका हुआ है और विशेष रूप से ईसाई समुदाय को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लाया गया है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और चैरिटेबल संस्थाओं के कामकाज को सीमित करेगा और केंद्र सरकार को अधिक हस्तक्षेप की शक्ति देगा।
संसद में पेश होने के बाद विवाद शुरू
यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग के जरिए जबरन धर्मांतरण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि विधेयक बिना पर्याप्त सूचना के पेश किया गया, जब कई सांसद चुनावी राज्यों में प्रचार में व्यस्त थे। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने विधेयक की खामियों की ओर ध्यान दिलाया था, बावजूद इसके इसे पेश कर दिया गया।
केंद्र को मिलेगा संगठनों पर कब्जे का अधिकार
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रस्तावित प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह FCRA लाइसेंस रद्द होने पर किसी भी संस्था खासतौर पर अल्पसंख्यक संगठनों का प्रशासन अपने हाथ में ले सके और उनके लिए प्रशासक नियुक्त कर सके। उन्होंने इसे दमनकारी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की और कहा कि कांग्रेस इस बिल का संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह विरोध करेगी।
केरल चुनाव के बीच आरोप-प्रत्यारोप
आगामी 9 अप्रैल को होने वाले केरल चुनाव के बीच इस मुद्दे ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि देशभर में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घटनाएं बढ़ रही हैं और इसे एक पैटर्न के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि केरल में चुनावी रैलियों के दौरान वे स्पष्ट करें कि यह विधेयक आखिर किसे निशाना बना रहा है।
सबरीमला और AIIMS मुद्दा भी उठाया
वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पालक्काड की रैली में सबरीमला गोल्ड लॉस केस पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने कहा कि बीजेपी, जो खुद को श्रद्धालुओं की पार्टी बताती है, अब इस मुद्दे पर क्यों नहीं बोल रही। साथ ही, उन्होंने केरल को AIIMS देने के वादे पर भी सवाल उठाए और कहा कि अन्य राज्यों में संस्थान स्वीकृत होने के बावजूद केरल को अब तक इसका लाभ नहीं मिला।
यूडीएफ के वादे और दावा
कांग्रेस नेता ने कहा कि कांग्रेस-नेतृत्व वाला यूडीएफ अपने पांच प्रमुख वादों को पूरा करेगा और उन्हें विश्वास है कि आगामी चुनाव में गठबंधन को स्पष्ट जनादेश मिलेगा।
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