भारत ने चीन का प्रस्ताव किया खारिज, बातचीत में जमकर हुई तल्खी
नई दिल्ली: भारत और चीन के मध्य चल रहा सीमा संघर्ष मात्र वर्तमान की समस्या नहीं है, बल्कि यह दशकों पुरानी उस कूटनीतिक साजिश का परिणाम है जिसमें चीन ने भारत की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देने का प्रयास किया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, एक समय चीन ने भारत के समक्ष जमीन की 'अदला-बदली' का एक विवादास्पद प्रस्ताव रखा था, जिसे भारत ने अपनी संप्रभुता का अपमान मानते हुए तत्काल ठुकरा दिया था।
चीन का विवादित 'बार्टर ऑफर' और कूटनीतिक चाल
वर्ष 1959-60 के दौरान चीनी प्रधानमंत्री झोउ एनलाई ने भारत के सामने एक प्रस्ताव पेश किया था, जो वास्तव में चीन की विस्तारवादी नीति का हिस्सा था। चीन चाहता था कि भारत सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'अक्साई चिन' पर अपना दावा हमेशा के लिए छोड़ दे और इसके बदले में चीन अरुणाचल प्रदेश (तत्कालीन नेफा) को भारत का हिस्सा स्वीकार कर लेगा। चीन की इस मंशा के पीछे असल कारण उसके दो अशांत क्षेत्रों—झिंजियांग और तिब्बत को जोड़ने वाले राजमार्ग का अक्साई चिन से गुजरना था। भारत ने इस चालाकी को भांपते हुए स्पष्ट कर दिया था कि राष्ट्र की एक इंच जमीन पर भी किसी प्रकार का व्यापार नहीं किया जा सकता।
संप्रभुता की रक्षा और ऐतिहासिक स्पष्टता
चीन की रणनीति अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिण तिब्बत' बताकर उस पर अपना फर्जी दावा पेश करने की रही है, जबकि अरुणाचल ऐतिहासिक और संवैधानिक रूप से सदैव भारत का अभिन्न अंग रहा है। चीन का मुख्य उद्देश्य भारत को मैकमोहन लाइन की वैधता पर स्वयं प्रश्न उठाने के लिए विवश करना था। भारतीय रणनीतिकार जानते थे कि अक्साई चिन पर समझौता भविष्य में अरुणाचल के लिए नए खतरों को जन्म देगा। भारत ने चीन के इस छलावे को स्वीकार करने के बजाय अपनी क्षेत्रीय अखंडता को सर्वोपरि रखा और इस सौदे को सिरे से खारिज कर इतिहास के कूड़ेदान में डाल दिया।
बदलता दौर और भारत का सशक्त रुख
वर्तमान समय में भारत का पक्ष और अधिक सुदृढ़ और स्पष्ट होकर उभरा है। 1960 के दशक की तुलना में आज का भारत रक्षा और बुनियादी ढांचे के मामले में कहीं अधिक शक्तिशाली है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों और पुलों के तेजी से हो रहे निर्माण ने चीन की बेचैनी बढ़ा दी है। भारत सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जब तक सीमा पर वर्ष 2020 से पूर्व की यथास्थिति बहाल नहीं होती, तब तक संबंधों का सामान्य होना संभव नहीं है। भारत का यह अटल रुख यह सिद्ध करता है कि देश की सीमाओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नामुमकिन है।
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की तारीख तय, 9 जून से इस ऐतिहासिक मैदान पर होगा मुकाबला
यूथ टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया का जलवा, श्रीलंका पर 211 रन की ऐतिहासिक जीत
CJP प्रोटेस्ट पर सियासत तेज, ओवैसी बोले- क्या प्रदर्शन करना अब खतरा माना जाएगा?
संवाद बनाम आंदोलन, CJP प्रदर्शन पर सरकार ने चार बार दिया बातचीत का प्रस्ताव
NEET मुद्दे पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, केंद्र पर पारदर्शिता नहीं बरतने का दावा
फास्ट-ट्रैक कोर्ट से मिलेगा जल्द न्याय, अमित शाह ने PM मोदी के फैसले को बताया अहम
जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले से पहले अय्यर का बड़ा बयान, बेखौफ क्रिकेट खेलने की सलाह
भारत के खिलाफ मुकाबले से पहले जिम्बाब्वे का बड़ा फैसला, टीम में हुआ फेरबदल
ग्वालियर में खुलेगा उद्योगों का नया रास्ता, टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन से बढ़ेंगे रोजगार
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर राज्यसभा में हंगामा, नड्डा ने रखा सरकार का पक्ष