केरल में CM रेस तेज, खड़गे के फैसले पर टिकी सबकी नजरें
नई दिल्ली: केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) की प्रचंड जीत के बाद अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के चयन पर टिकी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस आलाकमान आगामी रविवार, 10 मई को राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा कर सकता है। तिरुवनंतपुरम में हुई विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से एक लाइन का प्रस्ताव पारित कर अंतिम निर्णय का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंप दिया गया है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह लोकतांत्रिक है और किसी भी नेता पर कोई फैसला थोपा नहीं जा रहा है।
सत्ता के गलियारों में सतीशन का 'कड़ा रुख'
मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहे वी डी सतीशन को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों का दावा है कि सतीशन ने मुख्यमंत्री पद न मिलने की स्थिति में एक कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। बताया जा रहा है कि यदि उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाती है, तो वे मंत्रिमंडल में शामिल होने के बजाय केवल एक विधायक के रूप में काम करना पसंद कर सकते हैं। पार्टी के भीतर सतीशन के इस संभावित रुख ने आलाकमान की उलझन बढ़ा दी है, क्योंकि सरकार की स्थिरता और वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल बिठाना अब खड़गे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
सहयोगियों की मांग और गठबंधन का गणित
140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों की शानदार जीत के बाद गठबंधन के सहयोगी दलों ने भी अपनी दावेदारी पेश करना शुरू कर दिया है। केरल कांग्रेस (जोसेफ) के प्रमुख पी जे जोसेफ ने नई सरकार में अपनी पार्टी के लिए कम से कम दो मंत्री पदों की मांग की है। गठबंधन में शामिल अन्य छोटे दलों की अपेक्षाओं और कांग्रेस के अपने आंतरिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाना नई सरकार के गठन की पहली बड़ी परीक्षा होगी। पार्टी आलाकमान अब विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से मिली व्यक्तिगत राय के आधार पर ऐसा नाम तय करना चाहता है, जो सभी सहयोगियों को स्वीकार्य हो।
आंतरिक लोकतंत्र और आलाकमान का अंतिम फैसला
जेबी माथेर ने मीडिया से बातचीत में जोर देकर कहा कि विधायकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर के नेताओं और सीनियर विधायकों की राय को प्राथमिकता दी जाएगी। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि इतनी बड़ी जीत के बाद पार्टी के भीतर किसी भी तरह का असंतोष भविष्य के लिए ठीक नहीं होगा। यही वजह है कि खड़गे तमाम पहलुओं को तौलने के बाद ही रविवार को उस चेहरे के नाम पर मुहर लगाएंगे, जो केरल में 'यूडीएफ' की इस भारी जीत को सुशासन में बदलने का जिम्मा उठा सके।
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