भारतीय नौसेना को बड़ी मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल वाले 3 वॉरशिप की एंट्री
नई दिल्ली: हिंद महासागर में अपनी संप्रभुता को मजबूत करने और दुश्मनों की हर नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय नौसेना जल्द ही और अधिक घातक होने जा रही है। नौसेना के बेड़े में अत्याधुनिक निगरानी रडार और एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस तीन बड़े स्वदेशी जहाज शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सेना की इस नई तिकड़ी में एक स्टील्थ फ्रिगेट, एक एंटी-सबमरीन वॉरशिप (पनडुब्बी रोधी युद्धपोत) और समंदर की गहराइयों को नापने वाला एक अत्याधुनिक रिसर्च जहाज शामिल है। इस रणनीतिक कदम से न केवल भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमता में अभूतपूर्व इजाफा होगा, बल्कि समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर देश की स्थिति और अधिक अभेद्य हो जाएगी।
कोलकाता में तैयार हुए नौसेना के यह तीन नए रक्षक
भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनने जा रहे इन तीन जांबाज जहाजों के नाम 'दूनागिरि', 'अग्रय' और 'संशोधक' हैं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लोहा मनवाते हुए इन तीनों युद्धपोतों का निर्माण कोलकाता स्थित प्रतिष्ठित शिपयार्ड 'गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स' (GRSE) द्वारा किया गया है। निर्माण और कड़े समुद्री परीक्षणों के सभी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, शिपयार्ड ने हाल ही में इन जहाजों को आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना को सौंप दिया है, जिससे इनके सेना में विधिवत प्रवेश का रास्ता साफ हो गया है।
एक महीने के भीतर समंदर में शुरू होगी तैनाती
सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण करीब 45,000 करोड़ रुपये की इस विशाल परियोजना के तहत तैयार किए गए यह जहाज अगले एक महीने के भीतर नौसेना में अपनी सक्रिय सेवाएं शुरू कर सकते हैं। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, दुश्मनों की रडार को चकमा देने में माहिर स्टील्थ फ्रिगेट 'दूनागिरि' को आगामी एक माह के भीतर बेड़े का हिस्सा बना लिया जाएगा। इसी के साथ, पनडुब्बियों का शिकार करने वाले खतरनाक वॉरशिप 'अग्रय' और खोजबीन करने वाले 'संशोधक' जहाज को भी एक साथ ही जलतरंगों के हवाले किया जाएगा। इसके अलावा, परियोजना के तहत बचे हुए दो अन्य फ्रिगेट्स को भी अगले छह महीनों के भीतर नौसेना के बेड़े में शामिल करने की योजना है।
75 फीसदी स्वदेशी तकनीक और ब्रह्मोस की ताकत से लैस
यह पूरा घटनाक्रम भारत के 'स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम' की एक शानदार कामयाबी को दर्शाता है, क्योंकि इन युद्धपोतों को बनाने में लगभग 75 प्रतिशत घरेलू सामग्री और भारतीय तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इन जहाजों पर तैनात हथियार, उन्नत निगरानी प्रणालियां और सेंसर पूरी तरह से 'मेड इन इंडिया' हैं। मारक क्षमता की बात करें तो ये योद्धा खतरनाक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली बराक-8 मिसाइल प्रणाली, अत्याधुनिक एमएफ-स्टार रडार और अचूक एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता से लैस हैं। लगभग 149 मीटर की लंबाई वाले ये विशालकाय युद्धपोत समुद्र की लहरों को चीरते हुए 28 समुद्री मील (नॉट्स) की रफ्तार से दौड़ सकते हैं, जिन पर एक समय में 225 नौसैनिकों का क्रू तैनात रहकर देश की समुद्री सीमाओं की रखवाली करेगा।
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