ITR में इनकम मिसमैच होने पर क्या करें, आसान उपाय जानें
नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख जैसे-जैसे पास आ रही है, टैक्सपेयर्स की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। इस बार रिटर्न दाखिल करते समय आपको एक्स्ट्रा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। पिछले साल जिन रिटर्न में कमियां पाई गई थीं, उनकी प्रोसेसिंग में काफी लंबा वक्त लगा था। इनमें सबसे ज्यादा मामले कमाई की सही जानकारी न देने (इनकम मिसमैच) के थे, जिसके चलते लाखों लोगों का रिफंड अटक गया था और कईयों को टैक्स विभाग के नोटिस का सामना करना पड़ा था।
टैक्स विभाग का एडवांस एआई सिस्टम पकड़ रहा है गलतियां
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का डेटा-मैचिंग सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुका है। विभाग अब गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रिस्क एसेसमेंट और सिस्टम-बेस्ड वेरिफिकेशन का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में अगर आपके द्वारा दिखाई गई कमाई और टैक्स विभाग के पास मौजूद आपके डेटा में थोड़ा भी अंतर मिलता है, तो आपका फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है और जांच शुरू हो सकती है।
एआईएस (AIS) को बनाएं अपना मददगार
इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए जानकारों का कहना है कि टैक्सपेयर्स को एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की मदद लेनी चाहिए। टैक्स विभाग के पास हर टैक्सपेयर का पूरा वित्तीय लेखा-जोखा इस स्टेटमेंट में मौजूद रहता है। राहत की बात यह है कि आप इसे इनकम टैक्स की आधिकारिक वेबसाइट से आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। रिटर्न भरने से पहले इसके जरिए अपनी इनकम को क्रॉस-चेक करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
आपके हर बड़े-छोटे लेन-देन पर है पैनी नजर
AIS में आपके पूरे फाइनेंशियल ईयर की हर छोटी-बड़ी गतिविधि दर्ज होती है। इसमें आपकी सैलरी, बैंक से मिलने वाला ब्याज, डिविडेंड, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में किया गया निवेश, टीडीएस (TDS), टीसीएस (TCS), विदेश भेजा गया पैसा और प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री जैसी तमाम जानकारियां शामिल होती हैं। ये सारा डेटा टैक्स विभाग के पास बैंकों, म्यूचुअल फंड हाउसेज और अन्य वित्तीय संस्थानों के जरिए पहुंचता है।
इन जरूरी दस्तावेजों से जरूर करें मिलान
टैक्स कंसल्टेंट्स का मानना है कि केवल AIS देखना ही काफी नहीं है, बल्कि इसमें दी गई जानकारियों का मिलान अपने बैंक अकाउंट स्टेटमेंट, फॉर्म 26AS और फॉर्म 16 से भी कर लें। खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है कि उनके फॉर्म 16 में दर्ज सैलरी और AIS में दिख रही सैलरी का अमाउंट एक समान हो। अगर इसमें कोई गलती नजर आती है, तो उसे समय रहते ठीक कराया जा सकता है।
मिसमैच होने पर आ सकता है कानूनी नोटिस
अगर आपकी प्रॉपर्टी की डील, म्यूचुअल फंड निवेश, क्रेडिट कार्ड के बड़े पेमेंट्स या विदेशी लेन-देन की जानकारी आपके टैक्स रिटर्न से मेल नहीं खाती है, तो ऑटोमैटिक सिस्टम इसे तुरंत पकड़ लेगा। ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है और असंतोषजनक जवाब होने पर कानूनी नोटिस भी जारी कर सकता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि पूरा समय लेकर, सही आंकड़ों के साथ ही अपना रिटर्न फाइल करें।
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