पहाड़ों में ‘महाजाम’! मनाली की सड़कों पर घंटों थमी रफ्तार
मनाली: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली में वीकेंड और छुट्टियों के चलते पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। पर्यटन सीजन के चरम पर पहुंचते ही रविवार को पूरा इलाका भीषण ट्रैफिक जाम की चपेट में आ गया। सुबह से ही चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग, मनाली शहर, अटल टनल मार्ग, माल रोड, वशिष्ठ, सोलंगनाला और पलचान के रास्तों पर गाड़ियों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। हालात इतने खराब रहे कि वाहन घंटों तक एक ही जगह पर रेंगते नजर आए, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हजारों वाहनों के एक साथ पहुंचने से शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में यहाँ आने वाले सैलानियों की संख्या तो तेजी से बढ़ी है, लेकिन उस अनुपात में सड़कों की चौड़ाई और पार्किंग की व्यवस्था नहीं सुधारी गई है।
फाइलों में अटकी भुंतर-मणिकर्ण डबललेन योजना
पर्यटकों के पसंदीदा स्थल कसोल और पवित्र धार्मिक स्थल मणिकर्ण को जोड़ने वाली 'भुंतर-मणिकर्ण सड़क' को डबललेन (दो लेन) बनाने की सरकारी योजना पिछले लंबे समय से सिर्फ कागजों और फाइलों तक ही सीमित है। यह मुख्य मार्ग हाथीथान से लेकर मणिकर्ण तक कई जगहों पर बेहद संकरा और तंग है, जिसके कारण सरसाड़ी, जां, छन्नीखोड़, जरी और कसोल जैसे इलाकों में हर दिन जाम की समस्या और ज्यादा गहरी होती जा रही है। गौरतलब है कि यह सड़क पार्वती घाटी की 15 से अधिक पंचायतों की मुख्य लाइफलाइन (जीवनरेखा) है, लेकिन इसके बावजूद शासन-प्रशासन इसकी सुध लेने को तैयार नहीं है।
आपदा का फंड मिलने के बाद भी सड़क खस्ताहाल
यह मुख्य मार्ग साल 2023 और 2025 में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। विशेषकर 2023 की बाढ़ में पार्वती नदी के तेज बहाव ने इस 40 किलोमीटर लंबी सड़क को भारी नुकसान पहुंचाया था। इस मार्ग को सुधारने और दोबारा ठीक करने के लिए केंद्र सरकार ने आपदा राहत के तहत 38 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट भी जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर काम पूरा नहीं हो सका। हालात यह हैं कि बजट स्वीकृत होने के बाद भी सड़क पर टारिंग (तारकोल बिछाने) का काम अधूरा पड़ा है और भुंतर से कसोल आने वाले पर्यटकों को गहरे गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे यहाँ के पर्यटन व्यवसाय पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।
चुनाव में गूंज रहा है सड़क का मुद्दा
सड़क की इस बदहाली को लेकर पार्वती घाटी की जनता में भारी आक्रोश है। यही वजह है कि आगामी पंचायत चुनावों में बरशैणी जिला परिषद वार्ड के मतदाताओं ने खराब सड़क को अपना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना लिया है। चुनाव प्रचार के लिए आ रहे उम्मीदवारों से ग्रामीण सीधे सड़क की दुर्दशा और विकास कार्यों को लेकर तीखे सवाल पूछ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण कसोल, जहाँ साल भर विदेशी पर्यटक रहते हैं, और मणिकर्ण साहिब, जहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं, को जोड़ने वाली सड़क को तुरंत चकाचक किया जाना चाहिए। इसके अलावा दुनिया का सबसे प्राचीन लोकतंत्र माना जाने वाला 'मलाणा गांव' भी इसी घाटी में स्थित है, इसलिए इस सड़क का सुधरना पूरे क्षेत्र के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
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