"आम आदमी की जेब पर 'दोहरी मार'; ग्लोबल संकट के बीच मुंबई में फिर ₹2 महंगी हुई सीएनजी, ऑटो-टैक्सी का सफर होगा महंगा"
मुंबई | पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में छाई अनिश्चितता के चलते आम जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उससे सटे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में सीएनजी (CNG) की दरों में एक बार फिर इजाफा कर दिया गया है। इस ताजा संशोधन के तहत सीएनजी के खुदरा मूल्य में प्रति किलोग्राम दो रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर आम वाहन चालकों के बजट पर पड़ेगा।
महज 17 दिनों में दूसरी बार बढ़ी सीएनजी की कीमत
सीएनजी की यह नई दरें 29 मई 2026 की मध्यरात्रि से पूरे क्षेत्र में प्रभावी हो चुकी हैं। इस दो रुपये की बढ़ोतरी के साथ ही मुंबई में अब सीएनजी का खुदरा भाव 84 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 86 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी से निजी कार मालिकों के साथ-साथ ऑटो-टैक्सी और व्यावसायिक वाहन चालकों की परिचालन लागत बढ़ जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले बीते 14 मई को भी सीएनजी के दाम दो रुपये बढ़ाए गए थे, यानी केवल 17 दिनों के अंतराल में जनता को यह दूसरा झटका लगा है। वर्तमान में एमजीएल मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण, रायगढ़, रत्नागिरी, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, लातूर और उस्मानाबाद जैसे प्रमुख इलाकों में गैस की आपूर्ति करती है।
पेट्रोल और डीजल के दामों में भी लगातार उछाल
सीएनजी के अलावा पारंपरिक ईंधनों की कीमतें भी लगातार आसमान छू रही हैं। हाल ही में सोमवार को पेट्रोल के दामों में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। पिछले महज दो हफ्तों के भीतर तेल की कीमतों में किया गया यह चौथा संशोधन था। इस बढ़ोतरी के बाद मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 97.83 रुपये प्रति लीटर के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिससे माल ढुलाई और आवाजाही दोनों महंगी हो गई हैं।
वैश्विक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर
ईंधन की कीमतों में आ रही यह तेजी ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार देश के बढ़ते तेल आयात बिल को कम करने और घरेलू खपत को नियंत्रित करने के प्रयास कर रही है। दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पूरी तरह अस्थिर हो गया है। ईरान की जवाबी कार्रवाई और इजरायल व अमेरिकी ठिकानों पर हमलों से पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। इस वैश्विक टकराव के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से होने वाली कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है। मालूम हो कि दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है, और यहीं से सप्लाई चेन टूटने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
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