लोकतंत्र को बचाने की मुहिम: शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले का बड़ा फैसला, संसद के आगामी सत्र में पेश करेंगी विशेष विधेयक
मुंबई | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को घोषणा की है कि वे आगामी संसदीय सत्र में चुनाव प्रणाली में सुधार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेंगी। इस प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य उन चुनावों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, जिनमें अक्सर विधायकों या प्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के आरोप लगते हैं। बारामती सांसद का यह कड़ा रुख महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों को प्रलोभन देने और प्रशासनिक दबाव बनाने के आरोपों के बीच सामने आया है।
चुनावी प्रक्रिया में बड़े बदलाव और खुली वोटिंग की मांग
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के उपरांत मीडियाकर्मियों से संवाद करते हुए सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया कि वर्तमान अप्रत्यक्ष चुनावी प्रणालियों में संरचनात्मक सुधार बेहद आवश्यक हो गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि या तो इस प्रकार की गोपनीय मतदान वाली व्यवस्थाओं को तात्कालिक रूप से बंद कर दिया जाना चाहिए या फिर इनके स्थान पर 'ओपन वोटिंग' (खुला मतदान) का नियम लागू होना चाहिए। सुले ने बल देकर कहा कि ग्राम पंचायत के सरपंच पद से लेकर देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा तक के सभी चुनावों की प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी और संदेहरहित होनी चाहिए, ताकि लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे।
गठबंधन का सामूहिक फैसला और विपक्षी एकजुटता
विधान परिषद की 16 सीटों के लिए होने वाले आगामी मतदान से पूर्व महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के कुछ प्रत्याशियों द्वारा नामांकन वापस लेने के निर्णय को उन्होंने सही ठहराया। सुप्रिया सुले ने विपक्ष की आलोचनाओं का उत्तर देते हुए कहा कि कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) के शीर्ष नेताओं की बैठकों के बाद ही सामूहिक रूप से यह कदम उठाया गया था, क्योंकि हर तरफ धनबल के दुरुपयोग की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। इसके साथ ही उन्होंने पुष्टि की कि कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के व्यक्तिगत आमंत्रण पर उनकी पार्टी आगामी 8 जून को होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की उच्च स्तरीय बैठक में भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराएगी।
केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग और प्रांतीय सरकार पर प्रहार
प्रेस वार्ता के दौरान सांसद ने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग जैसी स्वायत्त केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। उन्होंने राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था, कृषि संकट, बेरोजगारी और विभिन्न वर्गों के आरक्षण से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करते हुए महाराष्ट्र सरकार को आम नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं और संवेदनशील मुद्दों के प्रति पूरी तरह उदासीन और संवेदनहीन करार दिया।
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