ओलंपिक मेडल पर नजर, अनाहत ने बताई अपनी बड़ी महत्वाकांक्षा
नई दिल्ली: भारत की स्टार महिला स्क्वाश खिलाड़ी अनाहत सिंह का कहना है कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य साल 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतना है। अनाहत ने खेलों के महाकुंभ के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि ओलंपिक में मेडल जीतने की चाहत हर एथलीट के दिल में होती है। स्क्वाश खेल को पहली बार ओलंपिक में शामिल किए जाने को लेकर दुनिया भर के खिलाड़ियों में भारी उत्साह है और सभी इस ऐतिहासिक मौके का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
स्क्वाश खिलाड़ियों के लिए खुला एक नया आसमान
अनाहत सिंह ने खेल के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए कहा कि इससे पहले किसी भी स्क्वाश खिलाड़ी के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स (राष्ट्रमंडल खेल) ही सबसे बड़ा मंच हुआ करता था, जहां वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकता था। लेकिन अब ओलंपिक का रास्ता खुलने से खिलाड़ियों के पास दुनिया के सबसे बड़े मंच पर चमकने का मौका है। अनाहत ने अपने भविष्य के प्लान को लेकर साफ किया कि अगले कुछ सालों तक उनका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ देश की झोली में मेडल डालने पर रहेगा। अपनी रणनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह बहुत आगे की सोचने के बजाय एक समय में केवल एक ही टूर्नामेंट पर अपना ध्यान केंद्रित करना पसंद करती हैं।
ओलंपिक के आने से कॉर्पोरेट जगत का मिला साथ
दूसरी ओर, भारतीय पुरुष स्क्वाश वर्ग के स्टार खिलाड़ी रमित टंडन ने भी इस फैसले पर खुशी जताई है। रमित का मानना है कि स्क्वाश को ओलंपिक में जगह मिलने से इस खेल की लोकप्रियता और पहुंच में भारी बदलाव आया है। अब बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने भी इस खेल को बढ़ावा देने के लिए आगे आ रहे हैं। रमित ने कहा कि ओलंपिक विश्व खेल जगत का सबसे बड़ा आयोजन है और इसमें हिस्सा लेना हर किसी का एक सपना होता है। उन्होंने आगे बताया कि जेएसडब्ल्यू (JSW) और अन्य बड़े कॉर्पोरेट घरानों के जुड़ने से खिलाड़ियों को बहुत लाभ हुआ है, और यह सब सिर्फ इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि अब यह खेल ओलंपिक का हिस्सा बन चुका है।
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