यूपी की सियासत में नई चर्चा, कांग्रेस-बसपा गठबंधन को लेकर डिप्टी सीएम का बड़ा खुलासा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी सांगठनिक चुनौतियों पर बेबाकी से अपनी राय रखी है। उनका स्पष्ट मानना है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही संपन्न होंगे। जनसंख्या की गणना का कार्य चुनाव के पहले या बाद में कभी भी पूरा किया जा सकता है। उन्होंने सूबे में तीसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने का दावा किया। डिप्टी सीएम ने कहा कि यदि बहुजन समाज पार्टी (बसपा), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) मिलकर भी चुनाव लड़ लें, तो भी जीत भाजपा की ही होगी; क्योंकि प्रदेश की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और नेतृत्व पर अटूट विश्वास है।
विशेष बातचीत के दौरान विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर पूछे गए सवालों के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:
कांग्रेस और बसपा के समीकरणों पर तंज
जब उनसे पूछा गया कि हाल ही में कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने मायावती से मुलाकात करने की कोशिश की थी, तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मंशा केवल बसपा के बचे हुए जनाधार के सहारे उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की है। बसपा सुप्रीमो इस चाल को बखूबी समझती हैं, यही वजह है कि उन्होंने कांग्रेस नेताओं को अपनी चौखट से ही वापस लौटा दिया। अब प्रदेश में बसपा का कोई राजनीतिक वजूद नहीं बचा है, क्योंकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने जनहित का कोई काम नहीं किया। आज उनका पुराना वोट बैंक पूरी तरह से भाजपा के साथ खड़ा है।
सपा के 'पीडीए' नारे पर पलटवार
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा भाजपा में पिछड़े और दलितों के सम्मान न होने के आरोप पर उप मुख्यमंत्री ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख को वर्ष 2012 से 2017 के बीच रही अपनी सरकार के कारनामों को नहीं भूलना चाहिए। उन्हें तो पिछड़े (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) समाज से अपने पुराने काम-काज के लिए माफी मांगनी चाहिए। सपा की राजनीति केवल हिंदू समाज को जातियों में बांटकर सत्ता हासिल करने की रही है।
जीत का अटूट भरोसा और चुनावी चुनौतियां
भाजपा की जीत को लेकर इतने आश्वस्त होने के सवाल पर डिप्टी सीएम ने कहा कि उनकी पार्टी देश के कई अन्य राज्यों में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है, इसलिए उत्तर प्रदेश में भी यह इतिहास दोहराया जाएगा। इस सच्चाई को लेकर अब विपक्ष के मन में भी कोई संशय नहीं है।
उन्होंने माना कि हर चुनाव अपने आप में एक चुनौती होता है, लेकिन इस बार भाजपा 2017 के आंकड़ों से भी ज्यादा सीटें जीतने जा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सपा प्रमुख में आम जनता का नेतृत्व करने की क्षमता नहीं है। यदि आज सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव जीवित होते, तो शायद उनकी पार्टी जमीनी स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर पाती।
भ्रष्टाचार पर अंकुश और प्रशासनिक व्यवस्था
प्रशासन में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इस पर काफी हद तक लगाम कसी है। व्यवस्था में अच्छे और खराब, दोनों तरह के अधिकारी होते हैं। लोकतांत्रिक ढांचे का अपना एक नियम है, लेकिन इस व्यवस्था में जनता ही सबसे ऊपर है। यदि कहीं भी कोई विसंगति होती है और जनता अपनी आवाज उठाती है, तो भ्रष्टाचारियों को पीछे हटना ही पड़ता है। पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में आज उत्तर प्रदेश तेजी से भ्रष्टाचार मुक्त शासन की ओर अग्रसर है।
मजदूर आंदोलन और एनकाउंटर पर जवाब
नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलनों को लेकर उन्होंने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि ये 'अर्बन नक्सल' (शहरी नक्सली) हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश का विकास और प्रगति रास नहीं आ रही है। लेकिन देश की जनता का भरोसा पीएम मोदी पर है, इसलिए ऐसी कोई भी साजिश कामयाब नहीं होगी।
वहीं, गाजीपुर में हुए कमलेश बिंद के एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों के जवाब में उन्होंने साफ किया कि सरकार किसी भी तरह के फर्जी एनकाउंटर की पैरवी नहीं करती है। यदि पीड़ित परिवार इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करेगा, तो नियमानुसार जांच कराई जाएगी और यदि कोई पुलिस अधिकारी इसमें दोषी पाया गया, तो उस पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।
जातिगत राजनीति और सरनेम का विवाद
विहिप (विश्व हिंदू परिषद) से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने और आज एक बड़े पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में पहचाने जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोग उनके सरनेम के कारण ऐसा आंकलन करते हैं। उन्हें इस पहचान से कोई आपत्ति भी नहीं है, क्योंकि उनकी पार्टी 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर काम करते हुए सभी समाजों और वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।
समय से पहले विधानसभा चुनाव की अटकलें
अंत में, राज्य में समय से पहले चुनाव होने की संभावनाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जनगणना की वास्तविक प्रक्रिया फरवरी 2027 में प्रस्तावित है, जिसके कारण राजनीतिक गलियारों में इस तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि चुनाव अपने तय समय पर ही होंगे। चुनावी तैयारियों के लिहाज से देखा जाए तो भाजपा हर परिस्थिति के लिए तैयार है। मतदान चाहे समय से पहले हो या अपने तय वक्त पर, उत्तर प्रदेश में कमल का खिलना पूरी तरह सुनिश्चित है।
राशिफल 26 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
छात्र आंदोलन पर सियासत तेज, राहुल बोले- PM मोदी माफी मांगें, अमित शाह जिम्मेदार
शरद पवार का खुलासा: PM से हुई चर्चा के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की कहानी में आया मोड़
नौकरी के नाम पर बना बंधक, युवकों की दर्दभरी कहानी सुन पुलिस भी रह गई हैरान
'यहां इस्तीफे नहीं होते'... लेकिन 12 साल में बदलते रहे मंत्री, जानिए पूरी कहानी
सीरिया में बड़ा सड़क हादसा, बस पलटने से 35 लोगों की गई जान
एक साथ 10 इस्तीफे, रालोद में उठे असंतोष के सुर, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
'धोखेबाज भतीजे' पर CM शुभेंदु का करारा प्रहार, सेबाश्रय शिविर घोटाले में दी चेतावनी