सख्त नियमों के बाद नेपाली फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप
काठमांडू: भारत सरकार द्वारा लागू की गई नई चाय आयात नीति के बाद नेपाल के चाय उद्योग पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भारतीय चाय बोर्ड द्वारा गुणवत्ता जांच के नियमों को बेहद कड़ा कर दिए जाने के कारण नेपाल से भारत होने वाला चाय का निर्यात लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। इस गतिरोध की वजह से नेपाल के पूर्वी जिलों, इलाम और झापा में स्थित दर्जनों चाय फैक्ट्रियों में ताले लटक गए हैं।
नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाम में 53 चाय फैक्ट्रियों ने 15 जून से अपना कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया है, जबकि झापा की 30 फैक्ट्रियों ने भी आने वाले कुछ दिनों में उत्पादन रोकने का आधिकारिक एलान कर दिया है।
हजारों मजदूरों और किसानों की आजीविका पर मंडराया संकट
इन फैक्ट्रियों के अचानक बंद होने से नेपाल के चाय क्षेत्र पर निर्भर हजारों कामगारों और किसानों की आजीविका सीधे तौर पर दांव पर लग गई है। केवल झापा जिले की बात करें, तो यहाँ करीब 20,000 मजदूर और किसान अपनी दैनिक कमाई के लिए पूरी तरह इसी उद्योग पर आश्रित हैं। इसके अलावा, अकेले सूर्योदय नगरपालिका में 2,995 किसान चाय की खेती से जुड़े हैं, जहाँ 33,655 रोपनी ज़मीन पर सालाना लगभग 2 करोड़ किलोग्राम हरी चाय की पत्तियों का उत्पादन होता है। फैक्ट्रियों के बंद होने से अब इन छोटे किसानों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।
गोदामों में भरी 7 लाख किलो चाय, भुगतान करने में असमर्थ हुए मालिक
नेपाली चाय एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस समय 3 लाख किलोग्राम से ज़्यादा नेपाली चाय भारतीय सीमा और बाजारों में पहुँच तो चुकी है, लेकिन अनिवार्य क्वालिटी टेस्टिंग (गुणवत्ता जाँच) प्रक्रियाओं के कारण वहीं फँसी हुई है। इसके अलावा, लगभग 7 लाख किलोग्राम से अधिक तैयार (प्रोसेस्ड) चाय फैक्ट्रियों के गोदामों में बिना बिकी पड़ी है।
सूर्योदय ऑर्थोडॉक्स टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिल्ली श्रेष्ठ का कहना है कि बिक्री पूरी तरह रुक जाने के कारण स्टोरेज की जगह खत्म हो चुकी है। जब तक तैयार माल बाज़ार में नहीं बिकता, तब तक फैक्ट्रियों को दोबारा चालू करना और किसानों को उनकी हरी पत्तियों का भुगतान करना पूरी तरह असंभव है।
भारतीय चाय बोर्ड की नई एसओपी (SOP) बनी नेपाल के लिए गले की फांस
चाय में मिलावटखोरी को रोकने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टी बोर्ड ऑफ इंडिया ने 1 मई से एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू किया है। इस नए नियम के तहत नेपाल से आने वाली चाय की हर एक खेप (कंसाइनमेंट) की कड़ाई से लैबोरेट्री टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई है।
नेपाली चाय उत्पादकों की शिकायत है कि इस टेस्ट की रिपोर्ट आने में दो हफ्ते से भी ज़्यादा का समय लग जाता है, और इस दौरान वे अपनी खेप को बेच नहीं सकते। कड़े नियमों के तहत यदि कोई भी सैंपल टेस्ट में फेल हो जाता है, तो पूरी चाय को या तो नेपाल वापस भेजना पड़ता है या फिर उसे वहीं नष्ट कर दिया जाता है।
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