यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए एक्शन में पुलिस, 100 से अधिक ऑटो चालकों पर कार्रवाई
बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर की सड़कों पर सफर को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारू बनाने के लिए यातायात पुलिस ने अपनी चेकिंग मुहिम को काफी तेज कर दिया है। शहर की चरमराती ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने हाल ही में नियमों का उल्लंघन करने वाले 100 से अधिक ऑटो चालकों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की है। वहीं, अगर पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो यातायात विभाग ने कुल 1,177 नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों पर चालानी और न्यायालयीन (कोर्ट) कार्रवाई का शिकंजा कसा है।
एएसपी ने दी चेतावनी: बिना यूनिफॉर्म कतई नहीं चलेंगे ऑटो
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) रामगोपाल करियारे ने इस पूरी मुहिम की आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार बैठकें आयोजित कर ऑटो यूनियनों और उनके चालकों को नियम-कायदों के दायरे में रहकर वाहन चलाने की हिदायत दी गई थी। अधिकारियों ने विशेष रूप से सभी ऑटो चालकों को निर्धारित यूनिफॉर्म (ड्रेस कोड) पहनकर ही स्टीयरिंग संभालने के कड़े निर्देश दिए थे, ताकि शहर में उनकी एक स्पष्ट और अलग पहचान सुनिश्चित की जा सके।
पुलिस का साफ कहना है कि इस नियम से शहर में यात्रा करने वाले आम यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा का स्तर काफी बढ़ जाएगा। इसके अलावा, यदि सड़क पर किसी बात को लेकर विवाद या अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित चालक को पहचानना बेहद आसान होगा। यातायात पुलिस इसके साथ ही सड़क पर शराब या किसी अन्य प्रकार का नशा करके गाड़ी दौड़ाने वाले चालकों पर भी गुप्त रूप से विशेष नजर रख रही है।
सुरक्षा और जवाबदेही के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य
यातायात विभाग का मानना है कि ऑटो चालकों के लिए तय की गई ड्रेस केवल एक औपचारिकता मात्र नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा और चालकों की जवाबदेही से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। बिलासपुर शहर में हर रोज हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिक और बाहर से आने वाले लोग ऑटो सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सफर करने वालों के मन में यह भरोसा होना बेहद जरूरी है कि जिस वाहन में वे बैठे हैं, उसका चालक पुलिस रिकॉर्ड में पंजीकृत है और उसकी पहचान पुख्ता है। यूनिफॉर्म होने से किसी भी प्रकार के विवाद, सड़क दुर्घटना, चोरी-चकारी या किसी भी असामाजिक गतिविधि के समय आरोपी चालक को तुरंत दबोचने में मदद मिलेगी।
पहले दी गई थी समझाइश, अब सीधे हो रहे हैं चालान
यातायात पुलिस के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों को लागू करने से पहले चालकों को बकायदा सात दिनों का पर्याप्त समय दिया गया था। पुलिस ने शुरुआत में केवल जागरूकता फैलाने और समझाइश देने पर जोर दिया था, लेकिन इसके बावजूद लापरवाही बरतने वालों पर अब सीधे कानूनी डंडा चलाया जा रहा है।
पिछले 30 दिनों के भीतर दर्ज किए गए 1,177 मामलों में मुख्य रूप से बिना ड्रेस कोड के ऑटो चलाना, नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़े करना, क्षमता से अधिक सवारियां बिठाना, जरूरी दस्तावेजों (फिटनेस, लाइसेंस, इंश्योरेंस) की कमी होना और ट्रैफिक सिग्नल्स को तोड़ना शामिल रहा है। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान आने वाले दिनों में भी इसी तरह लगातार जारी रहेगा।
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