भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के 5 अचूक उपाय, निर्जला एकादशी पर जरूर आजमाएं
हिंदू धर्म की सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और सबसे ज्यादा फलदायी माना गया है। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर बिना पानी पिए व्रत रखने का नियम है, जिससे भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में सफलता, मानसिक शांति और धन-वैभव की कामना रखता है, तो उसे इस पावन तिथि पर विशेष रूप से पांच प्रमुख कार्य अवश्य करने चाहिए। इस कठिन व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के सूर्योदय तक जल का पूरी तरह त्याग किया जाता है। जो लोग शारीरिक रूप से पूरी तरह निर्जल व्रत रखने में असमर्थ हैं, वे अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए फलाहार या पानी पीकर भी यह व्रत कर सकते हैं क्योंकि भगवान केवल सच्चे भाव के भूखे हैं।
व्रत की महिमा और इसके लाभ
निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वोच्च माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति साल भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता है, तो वह केवल इस एक व्रत को सच्चे मन से करके पूरे वर्षभर के व्रतों के बराबर पुण्य फल प्राप्त कर सकता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से संसार के सभी तीर्थों में स्नान करने के समान फल मिलता है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसके साथ ही इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने से कुंडली में मौजूद पितृदोष और चंद्रदोष से भी मुक्ति मिलती है।
जल कलश का दान और विष्णु-लक्ष्मी पूजन
इस व्रत में जल दान करने का सबसे बड़ा महत्व है क्योंकि यह भीषण गर्मी के मौसम में आता है। इस दिन एक मिट्टी के कोरे घड़े को साफ पानी से भरकर, उसमें थोड़ा गंगाजल, चीनी या गुड़ मिलाकर और उस पर दक्षिणा या मौसमी फल रखकर किसी जरूरतमंद को दान करने से पूरे वर्ष की एकादशियों का पुण्य मिल जाता है। इसके अलावा, जीवन से दरिद्रता दूर करने के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का संयुक्त पूजन करना चाहिए। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करना चाहिए, जिससे नौकरी और व्यापार में तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
पीले वस्त्र, तुलसी दल और राहगीरों के लिए प्याऊ
भगवान विष्णु को पीला रंग और तुलसी का पत्ता बेहद प्रिय है। इस दिन भगवान को पीले फूल, फल और मिठाइयों का भोग लगाना चाहिए और उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखना चाहिए। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी में जल नहीं चढ़ाया जाता और न ही पत्ता तोड़ा जाता है, इसलिए पत्ता एक दिन पहले ही तोड़ लेना चाहिए। इसके साथ ही, इस दिन किसी सार्वजनिक स्थान पर राहगीरों के लिए ठंडे पानी या मीठे शर्बत की व्यवस्था (प्याऊ) करानी चाहिए। प्यासे को पानी पिलाने और धूप से बचने के लिए छाता या चप्पल दान करने से पितृदेव प्रसन्न होते हैं और घर में खुशहाली आती है।
शाम को दीपदान और विष्णु सहस्रनाम का पाठ
एकादशी की शाम का समय आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक अवश्य जलाना चाहिए। दीपदान करने के बाद शांत मन से आसन पर बैठकर 'विष्णु सहस्रनाम' या 'नारायण कवच' का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से घर के भीतर मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक परेशानियाँ नष्ट हो जाती हैं, कर्ज से मुक्ति मिलती है और धन के नए स्रोत बनते हैं।
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