मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, आज की कैबिनेट बैठक से निकल सकते हैं बड़े संकेत
नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट में बड़े फेरबदल और विस्तार की अटकलों के बीच देश की राजनीति में भारी हलचल देखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की, जिसके तुरंत बाद इस फेरबदल की संभावनाओं को और बल मिल गया है। इस बीच, आज यानी बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक भी बुलाई गई है।
इस पूरे घटनाक्रम से ठीक पहले मंगलवार की सुबह केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति ने तुरंत मंजूर भी कर लिया है। दरअसल, बीजेपी ने कुरियन को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजने का फैसला किया था, जिसके कारण कार्यकाल समाप्त होने पर उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
रवनीत सिंह बिट्टू भी दे सकते हैं इस्तीफा
जॉर्ज कुरियन के बाद अब एक और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के भी इस्तीफा देने के कयास लगाए जा रहे हैं। बिट्टू का भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और बीजेपी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन में नहीं भेजा है। इसके पीछे पार्टी की एक बड़ी रणनीतिक योजना मानी जा रही है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और पार्टी ने बिट्टू को पूरी तरह से पंजाब की जमीनी राजनीति में सक्रिय होने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी उन्हें आगामी राज्य चुनाव में प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार सकती है।
NDA में आए नए सहयोगियों को मिल सकती है कैबिनेट में जगह
संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्षी खेमे में हुई बड़ी टूट का असर अब सीधे मोदी कैबिनेट पर दिखने की संभावना है। हाल ही में विपक्षी दलों के कई सांसदों ने पाला बदलकर एनडीए (NDA) को समर्थन देने का एलान किया है:
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आम आदमी पार्टी (AAP): 'आप' के 7 राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
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शिवसेना (UBT): उद्धव ठाकरे गुट के 6 लोकसभा सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना (NDA घटक) में शामिल हो चुके हैं।
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तृणमूल कांग्रेस (TMC): टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने अलग होकर 'NCPI' का गठन किया है और सदन में एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की है।
राजनीतिक गलियारों में मजबूत चर्चा है कि इन बागी और नए सहयोगी सांसदों को मोदी सरकार अपनी टीम में शामिल कर सकती है।
राघव चड्ढा और सुदीप बंदोपाध्याय के नामों की चर्चा तेज
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले संभावित चेहरों में कुछ बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं:
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राघव चड्ढा: आम आदमी पार्टी से बगावत कर 7 सांसदों को बीजेपी में लाने के सूत्रधार रहे राघव चड्ढा को उनके इस कदम का बड़ा 'इनाम' मिल सकता है और उन्हें कैबिनेट में जगह दी जा सकती है।
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सुदीप बंदोपाध्याय और शर्मिला सरकार: टीएमसी छोड़कर NCPI गुट बनाने वाले 20 सांसदों में से इन दोनों वरिष्ठ नेताओं का नाम मोदी कैबिनेट की रेस में सबसे आगे चल रहा है।
क्यों जरूरी हुआ नए सहयोगियों को मौका देना?
इस बड़े फेरबदल के पीछे बीजेपी का एक बहुत बड़ा और दूरगामी विधायी एजेंडा छिपा है। दरअसल, मोदी सरकार लोकसभा चुनाव 2029 से पहले अपने मुख्य एजेंडे 'परिसीमन बिल' (Delimitation Bill) को संसद में दोबारा पास कराना चाहती है। अप्रैल 2026 में इसके गिर जाने के बाद, इस बार सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। इस बेहद महत्वपूर्ण संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता है। यही कारण है कि बीजेपी नए सहयोगियों और बागी सांसदों को कैबिनेट में हिस्सेदारी देकर अपने साथ जोड़े रखना चाहती है।
कई मौजूदा मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी
सूत्रों और मीडिया दावों के मुताबिक, इस फेरबदल में केवल नए लोगों की एंट्री ही नहीं होगी, बल्कि कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी की जा सकती है। पार्टी इस बार 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत पर कड़ाई से काम कर सकती है। इसके तहत जिन मंत्रियों को संगठन या राज्यों में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें कैबिनेट से हटाया जा सकता है। इसके अलावा, वर्तमान में एक से अधिक विभागों का कार्यभार संभाल रहे 9 से ज्यादा मंत्रियों के विभागों को भी पुनर्गठित (री-एलोकेट) किया जा सकता है।
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