रविशंकर प्रसाद का दावा- सत्ता बचाने के लिए लगाया गया था आपातकाल
नई दिल्ली: देश में आपातकाल (इमरजेंसी) के 50 साल पूरे होने के मौके पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस सिलसिले में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि 1975 में देश पर आपातकाल किसी राष्ट्रीय संकट के कारण नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ इंदिरा गांधी की प्रधानमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए थोपा गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद लगाया गया आपातकाल
रविशंकर प्रसाद ने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के रायबरेली से हुए चुनाव को पूरी तरह निरस्त (रद्द) कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ इंदिरा गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां से भी उन्हें पूरी राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने उन्हें संसद में बैठने की अनुमति तो दी, लेकिन सदन में बोलने या वोट करने की इजाजत नहीं दी थी। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि इसी के बाद अपनी राजनीतिक सत्ता और पद को सुरक्षित रखने के लिए पूरे देश को आपातकाल की आग में झोंक दिया गया।
लोकतंत्र के सभी स्तंभों को कुचला गया
रविशंकर प्रसाद ने उन दिनों को याद करते हुए कहा कि आज जो लोग संविधान और लोकतंत्र बचाने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि 50 साल पहले लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ क्या किया गया था। आपातकाल लागू होते ही विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया था। उन्होंने बताया कि वे खुद उस समय जयप्रकाश नारायण (जेपी) आंदोलन में पूरी तरह सक्रिय थे और उन्हें भी 'मीसा' कानून के तहत जेल में बंद कर दिया गया था। उस दौर में लोकतंत्र के सभी प्रमुख स्तंभों को पूरी तरह कुचलकर संवैधानिक संस्थाओं का जमकर दुरुपयोग किया गया था।
पीएम मोदी ने कहा- 'संविधान हत्या दिवस'
इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर इस दिन को लेकर एक पोस्ट साझा की है। प्रधानमंत्री ने आपातकाल की बरसी को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में याद करते हुए लिखा कि यह दिन हमें इतिहास के उस काले दौर की याद दिलाता है, जब भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को बुरी तरह कुचला गया था और देश के नागरिकों के अधिकार छीन लिए गए थे।
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