भाजपा ने नई टीम से साधे कई समीकरण, समझौते और संतुलन की रणनीति आई सामने
लखनऊ: आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लंबी प्रतीक्षा, अनगिनत अटकलों और लखनऊ से दिल्ली तक कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा घोषित इस 48 सदस्यीय टीम पर प्रभावशाली नेताओं के सामंजस्य, समझौते और अंदरूनी संतुलन की स्पष्ट छाया दिखाई दे रही है। इस नई टीम में पुराने चेहरों के स्थान पर नए लोगों को मौका देकर नयापन लाने की कोशिश की गई है, जिसमें दूसरे दलों से आए नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
कई दिग्गजों की छुट्टी, नीरज सिंह को बड़ी जिम्मेदारी
पार्टी ने आगामी चुनाव में नया नेतृत्व उभारने का संदेश देने के लिए पुरानी टीम के आधे से ज्यादा चेहरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस बड़े बदलाव में विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र व नोएडा से विधायक पंकज सिंह जैसे कद्दावर नेताओं को नई टीम में जगह नहीं मिली है। हालांकि, पंकज सिंह की जगह उनके छोटे भाई नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, जो संगठन पर बड़े नेताओं के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। कुछ पुराने पदाधिकारियों को पदोन्नति देकर कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने का प्रयास भी किया गया है।
कोर वोट बैंक पर फोकस, पर जातीय असंतुलन बरकरार
पार्टी नेतृत्व ने इस टीम के जरिए अपने कोर वोट बैंक—पिछड़ी, अति पिछड़ी और दलित जातियों को भरपूर हिस्सेदारी दी है। अगड़े और पिछड़े वर्ग के बीच संतुलन बनाने की पुरजोर कोशिश की गई है, लेकिन इसके बावजूद जातियों की आबादी के लिहाज से समानुपातिक असंतुलन खुलकर सामने आ गया है। इस कोशिश में कुछ ऐसे विवादित या अप्रत्याशित चेहरों को भी जगह मिल गई है, जो आने वाले दिनों में संगठन के लिए तीखी आलोचना का आधार बन सकते हैं।
ब्राह्मणों और भूमिहारों के प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल
नई कार्यकारिणी में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने का दावा तो किया गया है, लेकिन आंकड़ों के लिहाज से यह पूरी तरह संभव नहीं हो पाया है। प्रदेश में करीब 12 से 14 फीसदी आबादी वाले ब्राह्मण समाज को इस बार जनसंख्या के अनुपात में कम प्रतिनिधित्व मिला है। इसके विपरीत, राज्य में महज 1 फीसदी आबादी वाले भूमिहार या त्यागी समाज को ज्यादा तवज्जो दी गई है। घोषित 48 सदस्यीय टीम में अकेले भूमिहार समाज से 4 पदाधिकारी बनाए गए हैं, जिसे लेकर अब संगठन के भीतर और बाहर असंतुलन के सवाल खड़े होने लगे हैं।
CJP आंदोलन के बीच बढ़ा विवाद, मेट्रो स्टेशन बंद होने पर CJI ने मांगा समाधान
राजनीतिक प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप, BJP-कांग्रेस भिड़ंत में 16 पुलिसकर्मी जख्मी
होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब पर नजर, बंद हुआ रास्ता तो बढ़ सकती है वैश्विक मुश्किलें
बरगी के सालीवाड़ा में बवाल, दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प; एक की मौत
'जन नायकन' के लीक ने बढ़ाई टेंशन, फिल्म इंडस्ट्री में छिड़ी नुकसान बनाम 'जीरो इम्पैक्ट' की जंग
PM आवास योजना से लेकर जनसमस्याओं तक, शिकायतों के बाद भी निगम प्रशासन बेखबर
ट्रंप की नई टैरिफ नीति से बदलेगा वैश्विक व्यापार, भारत के लिए सुनहरा मौका
जंतर-मंतर प्रदर्शन: CJP बोला- 'ज्यादातर पुलिसकर्मी सुरक्षित, मामूली चोटें आईं'
विपक्ष की मांग के बावजूद धर्मेंद्र प्रधान पर सरकार का भरोसा बरकरार?
एयरोस्पेस सेक्टर में भारत की बड़ी छलांग, HAL और Safran समझौते से देश में बनेंगे इंजन पार्ट्स