कार्यकारिणी की सूची बनी विवाद की वजह, दो पदाधिकारियों ने छोड़ा पद
ग्वालियर: ग्वालियर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी घोषित होते ही संगठन के भीतर का असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। नई सूची जारी होने के कुछ ही समय बाद दो नवनियुक्त पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। दोनों ही नेताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट साझा कर पद छोड़ने की जानकारी दी है, जिसके बाद से जिले की सियासत और कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
सचिव बनने के तुरंत बाद लतीफ खान ने छोड़ा पद
कांग्रेस द्वारा जारी की गई नई कार्यकारिणी की सूची में लतीफ खान को 47वें क्रम पर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, नियुक्ति की घोषणा के कुछ ही देर बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर पद छोड़ने का ऐलान कर सबको चौंका दिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "शहर जिला कांग्रेस कमेटी में स्वाभिमान से समझौता नहीं। नवनियुक्त सचिव पद से अपना इस्तीफा देता हूं। माननीय अध्यक्ष जीतू पटवारी जी का धन्यवाद।" इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि वे अपना आधिकारिक इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (पीसीसी चीफ) जीतू पटवारी को भेज रहे हैं।
महासचिव बनाए गए प्रतीक जैन ने भी दी इस्तीफे की घोषणा
इस्तीफा देने वाले दूसरे नेता प्रतीक जैन हैं, जिन्हें नई कार्यकारिणी में 26वें क्रम पर महासचिव बनाया गया था। उन्होंने भी सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए पद संभालने से इनकार कर दिया। प्रतीक जैन ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे महासचिव पद की जिम्मेदारी देने के लिए वरिष्ठ नेतृत्व का आभार। मैं कांग्रेस का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं। मुझे किसी पद की लालसा नहीं है, इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा देता हूं।”
संगठन में बढ़ी हलचल, वरिष्ठता की अनदेखी की चर्चा
नई सूची के आते ही एक के बाद एक दो बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफों से ग्वालियर कांग्रेस में खलबली मच गई है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि इतनी जल्दी पद छोड़ने के पीछे पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और संगठनात्मक तालमेल की कमी एक मुख्य वजह हो सकती है। सूची में दिए गए क्रम और पदों को लेकर नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है।
कांग्रेस संगठन की ओर से अब तक प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे सियासी घटनाक्रम और दोनों नेताओं के इस्तीफों पर फिलहाल कांग्रेस संगठन या किसी बड़े पदाधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना यह होगा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन नाराज नेताओं के इस्तीफे सीधे स्वीकार करता है या फिर संगठन में डैमेज कंट्रोल के लिए इन्हें मनाने की कोई कोशिश की जाती है।
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