कोचिन शिपयार्ड OFS में निवेश का मौका, रिटेल निवेशक आज ऐसे लगा सकते हैं बोली
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख रक्षा कंपनी कोचिन शिपयार्ड का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) बुधवार, 8 जुलाई को रिटेल निवेशकों के लिए खुल गया है। इससे एक दिन पहले यानी 7 जुलाई को इसे गैर-रिटेल (संस्थागत) निवेशकों के लिए खोला गया था, जहां इसे बेहद शानदार रिस्पॉन्स मिला। हालांकि, इस हिस्सेदारी बिक्री की खबरों के बीच कंपनी के शेयरों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है, जिससे निवेशक थोड़े सतर्क नजर आ रहे हैं।
सरकार द्वारा पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी
केंद्र सरकार अपने चालू वित्त वर्ष के विनिवेश कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए कोचिन शिपयार्ड में अपनी 5.04 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच रही है। शुरुआत में इस ओएफएस के तहत 13.2 लाख शेयर यानी 2.52 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव था, लेकिन पहले ही दिन गैर-रिटेल निवेशकों की श्रेणी में इसे 3.52 गुना अधिक सब्सक्रिप्शन मिला। इस जबरदस्त मांग को देखते हुए सरकार ने अतिरिक्त 2.52 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए 'ग्रीन-शू' विकल्प का उपयोग करने का निर्णय लिया है, जिसके बाद अब कुल 5.04 फीसदी हिस्सेदारी बाजार में बेची जाएगी। इस बड़ी हिस्सेदारी बिक्री से पहले मार्च तिमाही के अंत तक कंपनी में सरकार के पास 67.91 फीसदी शेयर थे।
प्रति शेयर चौदह सौ रुपये का फ्लोर प्राइस तय
इस विनिवेश प्रक्रिया के लिए सरकार ने प्रति शेयर 1,400 रुपये का न्यूनतम मूल्य (फ्लोर प्राइस) निर्धारित किया है। फ्लोर प्राइस वह सबसे कम कीमत होती है, जिससे नीचे कोई भी निवेशक शेयरों के लिए अपनी बोली नहीं लगा सकता। जहाजों के निर्माण और उनकी मरम्मत के क्षेत्र में देश की अग्रणी पहचान रखने वाली इस डिफेंस पीएसयू में हिस्सेदारी बेचकर सरकार को बाजार से लगभग 1,800 करोड़ रुपये जुटाने की पूरी उम्मीद है।
बाजार में कोचिन शिपयार्ड के शेयरों में गिरावट
इस ओएफएस के आते ही कोचिन शिपयार्ड के शेयरों पर दबाव साफ देखा जा रहा है। बुधवार को सुबह के कारोबार में कंपनी का शेयर करीब 2.28 फीसदी की कमजोरी के साथ 1,412 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा। पिछले एक सप्ताह के भीतर इस शेयर के भाव में 6 फीसदी से ज्यादा की बड़ी गिरावट आ चुकी है, जिसके चलते बाजार में शेयर की मौजूदा कीमत और सरकार द्वारा तय किए गए 1,400 रुपये के फ्लोर प्राइस के बीच का अंतर अब बहुत कम रह गया है।
विनिवेश के जरिए बड़ा वित्तीय लक्ष्य हासिल करने का रोडमैप
सरकार ने इस पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान अलग-अलग सरकारी कंपनियों में अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचकर और परिसंपत्तियों के मौद्रिकरण से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। सरकार की यह रणनीतिक मुहिम लगातार जारी है, जिसके तहत जून के महीने में भी कोल इंडिया, एनएलसी इंडिया, एनएचपीसी, आईआरएफसी और जीआईसी जैसी कई बड़ी सरकारी कंपनियों के ओएफएस बाजार में पेश किए जा चुके हैं। आम निवेशक जो इस ओएफएस में भाग लेना चाहते हैं, वे अपने ब्रोकर ऐप या ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए तय फ्लोर प्राइस पर बोली लगाकर इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं।
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