कैलाश पर्वत दर्शन के लिए दो महीने का इंतजार, मौसम भी बदल रहा हर दिन
पिथौरागढ़: तिब्बत में स्थित हिंदुओं के परम पावन कैलाश पर्वत के भारतीय सीमा से दर्शन करने की आस लगाए बैठे शिवभक्तों को अभी करीब दो महीने का लंबा इंतजार और करना होगा। वर्तमान में इस प्रतिबंधित सीमांत क्षेत्र के लिए जरूरी 'इनर लाइन परमिट' (ILP) जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह रोक दिया गया है। स्थानीय जिला प्रशासन के मुताबिक, आगामी सितंबर महीने के आसपास जब यह परमिट दोबारा शुरू होंगे, तभी आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु समुद्र तल से 17 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद 'ओल्ड लिपुलेख' (ओल्ड लिपुपास) पहुंचकर भारत की सरजमीं से कैलाश पर्वत के अलौकिक दर्शन कर पाएंगे।
खराब मौसम और सुरक्षा कारणों से सेना ने लगाई अस्थायी रोक
इस साल यात्रा सीजन की शुरुआत में देश के कोने-कोने से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ओल्ड लिपुलेख पहुंचकर कैलाश पर्वत के दर्शन किए थे। हालांकि, बाद में सीमा पर तेजी से बदलते खराब मौसम और सामरिक सुरक्षा कारणों को देखते हुए भारतीय सेना ने इस संवेदनशील क्षेत्र में आम नागरिकों की आवाजाही पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था। हाल ही में जिला प्रशासन और सेना के उच्चाधिकारियों के बीच हुई लंबी वार्ता के बाद कुछ सीमित वीआईपी पर्यटकों को तो वहाँ जाने की अनुमति दी गई, लेकिन आम श्रद्धालुओं के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) बंद होने के कारण अभी वहां जाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
17 हजार फीट की दुर्गम ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी बनी चुनौती
चीन सीमा से सटा ओल्ड लिपुलेख समुद्र तल से करीब 17 हजार फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित एक बेहद संवेदनशील और हाई एल्टीट्यूड क्षेत्र है। यहाँ पल-पल में मौसम का मिजाज बदलता रहता है और अक्सर घने कोहरे व बादलों के छा जाने के कारण कैलाश पर्वत के दीदार नहीं हो पाते। हालांकि, केंद्र सरकार के प्रयासों से अब ओल्ड लिपुलेख तक पक्की सड़क का निर्माण किया जा चुका है, लेकिन अंतिम चोटी के मुख्य पॉइंट तक पहुंचने के लिए आज भी श्रद्धालुओं को 300 मीटर की सीधी और खड़ी चढ़ाई पैदल ही नापनी पड़ती है। कई बार अत्यधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन के कम दबाव के कारण वाहन बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं, जिससे यात्रियों को करीब डेढ़ किलोमीटर का कड़ा सफर पैदल तय करना पड़ता है।
स्थानीय निवासियों ने की पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए परमिट खोलने की मांग
इस बीच, सीमांत क्षेत्र के स्थानीय कारोबारियों और गाइडों ने प्रशासन से मांग की है कि सेना के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर सभी पात्र और स्वस्थ श्रद्धालुओं को ओल्ड लिपुलेख जाने की अनुमति दी जाए, ताकि स्थानीय होमस्टे और पर्यटन व्यवसाय को गति मिल सके। गौरतलब है कि पिछले साल पहली बार आदि कैलाश और ओम पर्वत आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भारत की सीमा से ही कैलाश दर्शन का यह वैकल्पिक रूट शुरू किया गया था, जिसका तब करीब 10 हजार श्रद्धालुओं ने सफलतापूर्वक लाभ उठाया था।
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी (डीएम) आशीष भटगांई ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जिला प्रशासन लगातार सेना के अधिकारियों से समन्वय बनाए हुए है और सुरक्षा मानकों को परखते हुए ही श्रद्धालुओं को आगे भेजा जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल इनर लाइन परमिट पर रोक है, लेकिन जैसे ही सितंबर माह में यह सेवा पुनः बहाल होगी, आदि कैलाश और ओम पर्वत आने वाले सभी सामान्य यात्रियों को ओल्ड लिपुलेख से कैलाश दर्शन की पात्रता मिल जाएगी।
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