टाइग्रेस की सेहत पर संकट, जबलपुर वेटरनरी में डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी
जबलपुर। मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों को विचलित करने वाली एक बेहद चिंताजनक खबर प्रकाश में आई है। यहाँ विचरण करने वाली करीब एक से डेढ़ वर्ष की एक शावक बाघिन को अत्यंत गंभीर और नाजुक अवस्था में जबलपुर स्थित 'वेटरनरी कॉलेज के स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ' में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। इस घायल बाघिन में बेहद घातक और जानलेवा माने जाने वाले 'कैनाइन डिस्टेंपर वायरस' के संक्रमण की आशंका व्यक्त की जा रही है, जिसने समूचे मध्य प्रदेश वन विभाग के आला अधिकारियों से लेकर मैदानी कर्मचारियों तक में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जांच में बाघिन के पैरों में अत्यधिक सूजन पाई गई है और उसके आंतरिक अंगों में भी चोटों के निशान मिले हैं। उसकी अत्यंत नाजुक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों की देखरेख में उसे तत्काल जीवन रक्षक ड्रिप चढ़ाई गई है, तथा वायरस की वास्तविक पुष्टि के लिए आवश्यक ब्लड और स्वाब सैंपल लेकर उच्च स्तरीय प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं।
वायरस फैलने के खतरे को देखते हुए भोपाल के बजाय जबलपुर में किया जा रहा है इलाज
वन्यजीव विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार, रेस्क्यू किए जाने के बाद पहले इस घायल और अस्वस्थ बाघिन को चिकित्सा के लिए भोपाल स्थित 'वन विहार राष्ट्रीय उद्यान' भेजने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी। परंतु, यात्रा के दौरान ही वन्यजीव चिकित्सकों ने कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के अत्यधिक संक्रामक होने और इसके व्यापक खतरे को भांपते हुए रास्ते में ही अपना फैसला बदल दिया। इसके बाद अत्यंत एहतियात बरतते हुए उसे तुरंत जबलपुर वेटरनरी कॉलेज के विशेष केंद्र में स्थानांतरित (रेफर) कर दिया गया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, यह वही बाघिन है जिसने दो दिन पूर्व गश्त के दौरान वन विभाग के एक मैदानी कर्मचारी पर अचानक जानलेवा हमला कर उसे घायल कर दिया था। इस हिंसक घटना के बाद से ही वन्यजीव प्रबंधन पूरी तरह मुस्तैद हो गया था और बाघिन को सुरक्षित पकड़ने के लिए कान्हा और पेंच सफारी से विशेष टीमों को रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बुलाया गया था। वर्तमान में अत्याधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग कर पल-पल उसके स्वास्थ्य की कड़ी निगरानी की जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी से बना संशय का माहौल, जवाबदेही पर उठे सवाल
बाघिन के स्वास्थ्य को लेकर चल रही इस आपातकालीन और संवेदनशील प्रक्रिया के बीच, प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने और जानकारी साझा करने को लेकर अधिकारियों के बीच आपसी खींचतान और असहयोग की स्थिति देखी जा रही है। जब इस पूरे गंभीर मामले और बाघिन की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में 'स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ' की निदेशक डॉ. शोभा जावरे से प्रामाणिक जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने इस विषय पर किसी भी प्रकार की आधिकारिक टिप्पणी करने से साफ मना कर दिया। उन्होंने गेंद को उच्चाधिकारियों के पाले में डालते हुए कहा कि यह विषय पूरी तरह से वाइल्ड लाइफ पीसीसीएफ (PCCF) के अधिकार क्षेत्र का है।
दूसरी ओर, नौरादेही टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर रजनीश सिंह ने केवल इतनी बात स्वीकार की कि उन्होंने प्राथमिक उपचार के बाद बाघिन को बेहतर चिकित्सा के लिए जबलपुर रवाना किया था, परंतु अब उसकी मेडिकल रिपोर्ट या स्वास्थ्य से जुड़ा कोई भी संवेदनशील विवरण साझा करना उनके नियंत्रण में नहीं है और यह पूरी तरह से जबलपुर केंद्र की निदेशक के प्रशासनिक क्षेत्राधिकार में आता है। दोनों ही जिम्मेदार शीर्ष अधिकारियों की इस टालमटोल नीति और स्पष्ट जवाब न देने की प्रवृत्ति से बाघिन के वास्तविक स्वास्थ्य और इलाज की पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
संसद में नहीं थमा पेपर लीक विवाद, लोकसभा स्थगित, राज्यसभा में हंगामा जारी
परमाणु समझौते पर बढ़ी सियासत, अमेरिका-सऊदी डील पर वैश्विक बहस तेज
अफगानिस्तान करेगा दिल्ली में होम सीरीज की मेजबानी, भारत से तीन टी20 मुकाबले
रिकॉर्डबुक में दर्ज हुआ श्रेयस अय्यर का नाम, पहली जीत के साथ तोड़ा धोनी का रिकॉर्ड
छात्र आंदोलन पर विराट कोहली के नाम से वायरल पोस्ट, फैक्ट चेक में हुआ बड़ा खुलासा
अमेरिका में 'रामायण' का भव्य ट्रेलर लॉन्च, रणबीर कपूर ने राहा के लिए जताई खुशी
'रामायण' ट्रेलर पोस्टपोन होने के पीछे क्या है सच? अफवाहों और असली वजह से उठा पर्दा
प्रदर्शन खत्म करने की सलाह देकर घिरे सलमान खान, सोशल मीडिया पर मिली तीखी प्रतिक्रिया
सरकारी पाइप चोरी का खुलासा, मामा-भांजे को पुलिस ने दबोचा
शेयर बाजार में कैलिबर माइनिंग की शानदार एंट्री, पहले दिन 19% की बढ़त