राहुल गांधी की विदेश यात्रा बनी सियासी मुद्दा, BJP ने मांगा स्पष्टीकरण
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के आगाज से ऐन पहले कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर भाजपा के निशाने पर आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी के हालिया विदेश दौरे को लेकर चौतरफा हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सत्तारूढ़ दल का स्पष्ट कहना है कि देश की जनता को यह जानने का पूरा हक है कि विपक्ष के नेता 22 जून से 13 जुलाई के बीच किस देश की यात्रा पर थे, वहां उन्होंने किन-किन लोगों से मुलाकातें कीं और इस पूरे दौरे का वित्तीय खर्च किसने वहन किया।
भाजपा नेताओं के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष का संवैधानिक पद संभालने के बाद राहुल गांधी की विदेश यात्राओं में पारदर्शिता होना अनिवार्य है, क्योंकि बाहरी मुल्कों में होने वाली ऐसी मुलाकातों का सीधा असर भारत के राजनीतिक और रणनीतिक हितों पर पड़ सकता है।
भाजपा का तीखा सवाल- राहुल गांधी का विदेश दौरा रहस्य क्यों?
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुद्दे को उठाते हुए राहुल गांधी के करीब तीन हफ्ते लंबे विदेश प्रवास को एक बड़ा रहस्य करार दिया। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस नेता को खुद सामने आकर अपने इस दौरे के मकसद और वहां हुई बैठकों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए। भाजपा का आरोप है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टिकोण से देश की जनता को यह स्पष्ट पता होना चाहिए कि विपक्ष के इतने बड़े नेता विदेश में किन ताकतों के संपर्क में हैं।
वायनाड भूस्खलन को लेकर भाई-बहन पर साधा निशाना
विदेश दौरे के साथ-साथ भाजपा ने केरल के वायनाड में हुई प्राकृतिक आपदा को लेकर भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को आड़े हाथों लिया। भाजपा ने आरोप लगाया कि 7 जुलाई को अनक्कमपोयिल-मेप्पाडी ट्विन ट्यूब टनल परियोजना क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन के कारण आठ लोगों की जान चली गई, लेकिन इसके बावजूद वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी और वर्तमान सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पीड़ित परिवारों की सुध लेने या प्रभावित इलाके का दौरा करने नहीं पहुंचे।
राहुल की गैर-मौजूदगी से टला कांग्रेस का छात्र आंदोलन?
भाजपा ने कांग्रेस के आगामी छात्र संपर्क अभियान 'छात्रों की गूंज' के अचानक स्थगित होने के पीछे भी राहुल गांधी की अनुपस्थिति को ही मुख्य वजह बताया है। पार्टी का दावा है कि प्रयागराज, पटना और देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले इन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को सिर्फ इसलिए आगे बढ़ाना पड़ा क्योंकि राहुल गांधी ने अपना विदेश दौरा लंबा कर दिया है और उनके अब 17 जुलाई के आसपास स्वदेश लौटने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, इन तमाम सियासी हमलों के बीच कांग्रेस पार्टी की ओर से राहुल गांधी के इस दौरे को लेकर फिलहाल कोई भी आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान सामने नहीं आया है।
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