चांदी की चमक फीकी, कीमतों में गिरावट से खरीदारों को मिली राहत
नई दिल्ली: वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में भारी हलचल देखी जा रही है। इस वैश्विक टकराव का सीधा प्रभाव सोने और चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सभी स्थानीय करों (टैक्स) सहित चांदी की खुदरा कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के भाव में मामूली बढ़त दर्ज की गई, जो पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले कुछ रुपये की तेजी के साथ कारोबार कर रही है।
वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अवकाश का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मंचों पर भी श्वेत धातु की कीमतों में लगातार अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, जहां हाजिर चांदी के दाम ऊंचे स्तरों पर मंडरा रहे हैं। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार, सप्ताहांत पर बाजार बंद होने तक चांदी के भाव में सीमित दायरे का उतार-चढ़ाव देखा गया। चूंकि शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण घरेलू सराफा बाजार बंद रहते हैं, इसलिए इस दौरान शुक्रवार को तय किए गए बंद भाव ही पूरे देश में प्रभावी रहेंगे। बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान में विभिन्न एजेंसियों और एसोसिएशनों के दरों में मामूली अंतर देखा जा सकता है।
देश के प्रमुख शहरों में चांदी की दरें
भारत के भौगोलिक विस्तार और स्थानीय कर व्यवस्था के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में चांदी की कीमतों में भिन्नता नजर आ रही है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों में प्रति किलोग्राम के हिसाब से अलग-अलग दरें लागू हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद सहित बिहार के पटना और मध्य प्रदेश के इंदौर में कीमतें एक समान स्तर पर बनी हुई हैं। इसके विपरीत, दक्षिण भारत के चेन्नई, भुवनेश्वर और हैदराबाद जैसे शहरों में चांदी के भाव में अन्य राज्यों के मुकाबले थोड़ी अधिक तेजी देखने को मिल रही है, इसलिए निवेशकों को खरीदारी से पहले स्थानीय भाव जांचने की सलाह दी जाती है।
मुनाफावसूली और बदलती प्राथमिकताओं से कीमतों पर दबाव
दुनिया भर में मंडरा रहे युद्ध के बादलों के बावजूद चांदी की कीमतों में उम्मीद के मुताबिक उछाल न आने की मुख्य वजह निवेशकों का बदला हुआ रुख है। इस अनिश्चित और संकटपूर्ण वैश्विक माहौल में बड़े निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए चांदी के मुकाबले सोने को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प माना है। इसके साथ ही, ऊंचे स्तरों पर पहुंच चुकी चांदी में ट्रेडर्स द्वारा जमकर मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) की गई है, जिससे बाजार में इसकी तरलता बढ़ी और कीमतों पर दबाव आने से घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नरमी का रुख बन गया।
औद्योगिक मांग और भविष्य के आर्थिक समीकरण
चांदी की कीमतों का निर्धारण केवल निवेश के आधार पर नहीं होता, बल्कि यह एक प्रमुख औद्योगिक धातु भी है जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और अन्य विनिर्माण उद्योगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यही कारण है कि इसकी चाल पूरी दुनिया की आर्थिक सेहत और कारखानों की मांग पर काफी हद तक निर्भर करती है। वर्तमान समय में वैश्विक मंदी और औद्योगिक मांग में संभावित कमी की आशंका के चलते बड़े खरीदार थोक लिवाली से बच रहे हैं, जिससे बाजार में चांदी के भाव में यह सुस्ती और ठहराव देखने को मिल रहा है।
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